मैनपुरी/किशनी। जिले में सरकारी खरीद केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम है। कहीं वारदाना नहीं है तो कहीं किसानों को समय से भुगतान नहीं हो रहा है। किशनी के तीन खरीद केंद्रों पर वारदाना की कमी से गेहूं की खरीद सात मई से बंद है। किसान मजबूरन अपना गेहूं मंडी में सस्ते में बेच रहा है।
किशनी में क्षेत्रीय सहकारी समिति, सहकारी संघ और पीसीएफ के खरीद केंद्र बनाए गए हैं। पीसीएफ द्वारा संचालित गेहूं खरीद केंद्रों पर वारदाना और पैसों की कमी से किसान परेशान हैं। किशनी के खरीद केंद्रों पर वारदाना की कमी से सात मई से गेहूं की खरीद बंद है।
केंद्र प्रभारी वारदाना नहीं होने की बात कहकर किसानों को लौटा रहे हैं। क्षेत्रीय सहकारी समिति की सचिव सरला चौहान ने बताया कि उनके यहां दो दिनों से वारदाना ही नहीं है, तो गेहूं कैसे खरीदा जाए। केंद्र पर 22 लाख रुपये से ज्यादा के गेहूं की खरीद की जा चुकी है।
धनराशि नहीं होने से भुगतान करने में भी परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि चार मई को दस लाख रुपये मिले थे जिनका भुगतान किया जा चुका है। शेष किसानों को पैसे आने के बाद भुगतान होगा। सहकारी संघ और पीसीएफ केंद्र की भी ऐसी ही हालत है।
चार दिन पूर्व गेहूं बेचने क्षेत्रीय सहकारी संघ पर आए थे। आधे गेहूं की तुलाई भी हो गई थी, लेकिन वारदाना न होने के चलते संघ के कमरे में ही गेहूं रखकर चले गए जो आज तक नहीं तौला जा सका है।
- छोटेलाल, किसान
गेहूं बेचने के लिए केंद्र के लगातार चक्कर लगा रहे हैं। वारदाना नहीं होने की बात कहकर लौटाया जा रहा है। सरकारी केंद्र पर गेहूं नहीं खरीदे जाने पर मजबूरी में मंडी में गेहूं बेचना पड़ रहा है।
रामप्रकाश, किसान
समिति के सदस्य होने के बाद भी चार दिनों से गेहूं बेचने के लिए केंद्र के लगातार चक्कर काट रहे हैं। खरीद हो नहीं पा रही है और सचिव मिलते नहीं हैं। कोई जवाब देने वाला नहीं है।
- रामप्रकाश जिजई, सदस्य क्षेत्रीय सहकारी समिति
जिले में गेहूं खरीद के लिए 93000 बोरों का भंडार है। गेहूं खरीद के लिए 186 गांठें उपलब्ध हैं। एक गांठ में 500 बोरा होते हैं। वारदाने की कमी नहीं है। यदि किसी किसान को वारदाना की वजह से परेशानी हो रही है तो वह जानकारी देकर समाधान करा सकता है।
- नंद किशोर, खाद्य विपणन अधिकारी