कासगंज। लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। चुनाव के साथ ही मतदाताओं के मुद्दे सामने आने लगे हैं। चुनाव में किसानों के भी अपने मुद्दे हैं। किसान की सबसे बड़ी समस्या फसल का उचित भाव न मिलने को लेकर रहता है।
जिला 1955.28 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इस क्षेत्रफल में से 140700.619 हेक्टेअर भूमि कृषि कार्य में प्रयोग होती है। जिले के 185199 किसान अनाज, दलहन, तिलहन, सब्जियों के अलावा अन्य फसलों को उगाकर अपना जीवन यापन करते हैं। आजादी से अब तक 16 लोकसभा चुनाव हो चुके हैं, लेकिन किसानों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में किसी भी जनप्रतिनिधि ने आज तक कोई पहल नहीं की है। किसानों की सबसे बड़ी समस्या अपनी उपज का उचित भाव न मिल पाने की रहती है। किसान को अपनी फसल को मंडी में जाकर ही बेचना होता है, जिससे उनको उचित भाव नहीं मिल पाता। यदि जनपद में कृषि आधारित उद्योगों की बात की जाए तो यहां एक गन्ना मिल संचालित होती है। इसके अलावा कुछ चकोरी, मैंथा प्लांट, धान मिल निजीतौर पर संचालित होते हैं। जबकि अन्य फसलों के लिए कोई ऐसा उद्योग नहीं हैं जहां किसान अपनी फसल की खपत करके अच्छी आय कर सकें।
कृषि आधारित उद्योगों का इस क्षेत्र में पूरी तरह से अभाव है, यदि उद्योगों की स्थापना हो जाए तो किसान को काफी लाभ मिल सकता है।
विजय किसान
जिले में आलू का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। बाजार में भाव गिरजाने पर किसान को कोल्ड का किराया तक निकालने में दिक्कत हो जाती है, जिससे आलू फैंकना पड़ जाता है।
उमेश किसान
मक्का पर आधारित कई उद्योग हैं, लेकिन जिले में इनमें से एक भी उद्योग नहीं हैं। जिसका खामियाजा किसान को भुगतना होता है।
ओमप्रकाश, किसान
किसान को फसल का उचित भाव दिलाने की बात तो की जाती है, लेकिन इस दिशा में सार्थक प्रयास नहीं किए जाते।
सोरन सिंह
जिले में पैदा होने वाली प्रमुख फसलें
अनाज- गेहूं, जौ,धान,बाजरा, मक्का
तिलहन- तिल, सरसों, लाहा
दलहन- अरहर ,उर्द, मॅूग, चना
सब्जियां- मटर,आलू, फूल गोभी, लौकी, तोरई, करेला, टमाटर, भिंडी ं
मूगंफली, गन्ना, लहसुन, तंबाकू, चिकोरी, मैंथा
बागान- आम, अमरूद