प्राचीन धरोहर सहेजने एवं सोरों के विकाश के लिए लोग सरकार की ओर निहार रहे हैं। शासन में लंबित सुंदरीकरण का डीपीआर अभी विचाराधीन है। डीपीआर पर धन स्वीकृत न होने से पुरोहितों में मायूसी है। प्रशासन बार-बार धन स्वीकृति के लिए शासन को पत्र भेज रहा है।
284 हेक्टेयर गोलाकार क्षेत्रफल में फैली तीर्थ नगरी सोरों के बाशिंदे लंबे समय से तीर्थ स्थल घोषित करने की मांग कर रही थी। पिछले वर्ष जुलाई माह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रैली को संबोधित करने आए और सोरों को तीर्थ स्थल घोषित किए जाने का एलान किया। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद शासन ने जिला प्रशासन से सोरों के सुंदरीकरण के लिए डीपीआर तैयार कराया। प्रशासन ने पौराणिक विशेषज्ञ इंजीनियरों से सुंदरीकरण के लिए 86 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कराया। यह डीपीआर अंतिम प्रस्तुति करण के बाद नवंबर माह में प्रदेश सरकार को भेज दिया, लेकिन सरकार ने अभी तक इस डीपीआर पर गंभीरता से विचार नहीं किया और धन भी स्वीकृत नहीं किया। जिससे मुख्यमंत्री की योजना अधर में लटकी हुई है। पुरोहितों में भी मायूसी है। प्रशासन अब तक कई बार स्मरण पत्र भी भेज चुका है।
आंकड़े-
284 हेक्टेयर क्षेत्रफल में विकास का है प्रस्ताव।
46 हजार से अधिक की है आबादी।
लाखों श्रद्धालु हर साल पहुंचते हैं सोरों की धरा पर।
पुरोहितों की बात-
मुख्यमंत्री ने सोरों को तीर्थ स्थल बनाने की घोषणा की। उसके बाद प्रशासन ने शासन को डीपीआर भेज दिया। शासन से अभी तक नहीं मिला है जिससे पुरोहित नाखुश हैं। विनय दीक्षित।
- सरकार को चाहिए कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले ही सोरों को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित कर दे जिससे की सरकार पर पुरोहितों का विश्वास बना रहे। राम गोविंद महेरे।
- शासन स्तर पर डीपीआर विचाराधीन है। पत्राचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद डीपीआर तैयार कराया गया है। जल्द ही इस पर काम शुरू होने की उम्मीद है। आरपी सिंह, डीएम।