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सुविधाओं के अभाव में परिंदों ने तोड़ा नाता

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जलेसर। सुविधाओं का अभाव इंसान के साथ परिंदों के लिए भी मुसीबत बनता है। जिले के एकमात्र पर्यटन केंद्र पटना पक्षी विहार से मेहमान परिंदे रूठ गए हैं। शासन और प्रशासन की उपेक्षा के चलते परिंदों ने भी पक्षी विहार से मुंह मोड़ लिया। साथ ही पक्षी विहार में बना ज्ञान विज्ञान केंद्र भी बदहाली का शिकार है।

10 साल पहले पटना पक्षी विहार में पर्यटकों को पक्षियों के बारे में जानकारी देने के लिए पक्षी ज्ञान विज्ञान केंद्र की स्थापना हुई थी। जिसमें देश विदेश के पक्षियों की पूरी जानकारी थी, लेकिन कर्मचारियों के अभाव में लाखों रुपये की लागत से बना ज्ञान विज्ञान केंद्र बंद हो गया। मौजूदा समय में ज्ञान विज्ञान केंद्र धूल से अटा पड़ा है।
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यदि इसमें कर्मचारी तैनात हो तो पर्यटकों को प्रवासी अप्रवासी पक्षियों के बारे में जानकारी मिलेगी। साथ ही विभागीय राजस्व में बढोतरी होगी। वहीं वन क्षेत्राधिकारी पर दो स्थानों का अतिरिक्त चार्ज होने से वह महीने में एक दो बार ही आते हैं। महज दो कर्मचारियों के सहारे सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधाओं की व्यवस्था हो रही है। वहीं सुविधाओं का अभाव होने से प्रवासी पक्षियों की तादाद गिरती जा रही है।
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पहल हो तो चमके पक्षी विहार
पक्षी विहार के विकास के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी जैकब थॉमस, जिलाधिकारी मुकुल सिंघल, महेश गुप्ता ने रूचि दिखाई थी। उन्होंने पर्यटकों, होटल स्वामियों और पर्यटन विभाग के दिग्गजों को बुलाकर पक्षी विहार में सेमिनार का आयोजन कराया। साथ ही अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिक्षकों को अनेक जानकारी उपलब्ध कराई थीं, लेकिन इसके बाद जिम्मेदारों की मनमानी के चलते मामला ठप हो गया। यदि जिम्मेदार पहल करें तो पटना पक्षी विहार फिर चमक सकता है।
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राजहंस भी जोड़े के साथ आते
पटना पक्षी विहार की विशाल झील में लुप्त होते जा रहे राजहंस भी बड़ी संख्या में आते थे। झील में साफ-सफाई और उनके लिये पर्याप्त मात्रा में भोजन की व्यवस्था नहीं होने के कारण पिछले कई सालों से राजहंस नहीं आते। इसके अलावा साईबेरिया चीन के साथ-साथ अन्य देशों के लाखों पक्षी सर्दी के मौसम में पक्षी बिहार में आते थे, लेकिन अब नाम मात्र की संख्या में परिंदे आते हैं। वर्ष 2008 में परिंदों की संख्या करीब पांच लाख के पार पहुंच गई थी, लेकिन अब यह हजारों में सिमट गई है।
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पक्षी विहार में सुविधाएं नहीं होने से पक्षियों की तादाद अब कम हो गई है। इसे सहेजने की पहल की जाए।
बीना वर्मा
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सुरक्षा के पर्याप्त बंदोबस्त नहीं होने से पक्षियों के साथ पर्यटक भी कम आते हैं। पक्षी विहार का विकास होना चाहिए।
धीरज पाल सिंह
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पक्षी विहार में बना ज्ञान विज्ञान केंद्र बदहाली का शिकार है। जबकि यहां तमाम जानकारियां मिलती थीं।
राजू ठाकुर
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परिंदों की संख्या को सहेजने के लिए प्रशासन को पहल करने की जरूरत है।
विपेन शर्मा
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पटना पक्षी विहार को विकसित किए जाने के लिए हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं। पिछले दिनों पटना पक्षी विहार को देखकर भी आए है। वन विभाग के अधिकारियों से भी इसको लेकर बात की गई है। जिले के एक मात्र पर्यटन स्थल पहले से भी अधिक सुंदर बनाया जाएगा।
आईपी पांडेय, जिलाधिकारी
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