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दफ्तरों में फरियादी और जिला अस्पताल में मरीज बन कर पहुंचे मंडलायुक्त

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फोटो - दफ्तरों में फरियादी और जिला अस्पताल में मरीज बन कर पहुंचे मंडलायुक्त
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कई विभागों का किया स्टिंग आपरेशन तो कई जगह उन्हें पहचान लिया
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजाबाद। मंडलायुक्त के राममोहन राव ने शुक्रवार को सरकारी दफ्तरों का स्टिंग आपरेशन किया। कई दफ्तरों में अधिकारी अनुपस्थित मिले। दफ्तरों में फरियादी तो जिला अस्पताल में मरीज बनकर पहुंचे। स्टिंग के दौरान दो स्थानों पर वह पहचान लिए गए। एआरटीओ की दादागिरी वाली स्टाइल का मंडलायुक्त को भी शिकार होना पड़ा।
मंडलायुक्त के राममोहन राव आगरा से दोपहर 12 बजे जिला अस्पताल के गेट पर पहुंचे। बिना किसी एस्कार्ट के प्रदेश सरकार लिखी सफेद रंग की जिप्सी से जिला अस्पताल के गेट से आगे जाकर रुके। सिर पर सफेद रंग की टोपी के साथ वह आम नागरिक की तरह गमछा डाले हुए थे। वह सामान्य मरीज की तरह पर्चा बनवाने के लिए मरीजों के साथ कतार में लगे। अपना नंबर आने पर उन्होंने आंखे दिखाने के लिए राम सिंह के नाम से पर्चा बनवाया। लोगों से पूछा आंखों के डाक्टर कहां बैठते हैं जिला अस्पताल का राउंड लिया। सर्जिकल वार्ड के बाहर बरामदे में बैठे मरीजों के तीमारदारों के साथ दवा मिलती है या नहीं बातचीत की। तीमारदारों ने बताया कि अधिकांश दवाएं बाहर से ही लाते हैं। सर्जिकल वार्ड के अंदर मरीजों से बातचीत की, मरीजों ने बताया दूध नहीं मिलता। वार्ड के अंदर बने शौचालय के अंदर तक जाकर देखा एक टोंटी खराब थी। यहां से राउंड लेते हुए एक्स-रे कक्ष और दंत चिकित्सक के कक्ष में गए डाक्टर नहीं मिले। आंखों के डाक्टर के कक्ष में चिकित्सक नहीं थे स्टाफ बैठा था। मंडलायुक्त पर्चा दिखाते हुए बोले आंखें दिखानी हैं...। जवाब मिला कल आना..।
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प्रार्थना पत्र लेकर डीएम दफ्तर पहुंचे मंडलायुक्त
मंडलायुक्त डीएम कार्यालय पर दोपहर 12.45 बजे पहुंचे। डीएम कक्ष के बाहर बैठा एक कर्मचारी बेंच पर लेटे हुए मोबाइल पर बात कर रहा था। कर्मचारी ने बताया अभी कुछ देर पहले ही डीएम निरीक्षण के लिए गई हैं। डीएम कक्ष से निकलकर वह डीएम न्यायालय कक्ष में घूमते हुए एडीएम न्यायालय कक्ष में चले गए। यहां एडीएम कार्यालय के किसी कर्मचारी के पहचान लिए जाने के शक पर वह अधिक देर नहीं रुके।
एसपी देहात के दफ्तर में पहचान लिए
विकास भवन की तरफ जाते समय दोपहर 12.50 पर मंडलायुक्त एसएसपी कार्यालय पर रुक गए। एसएसपी कार्यालय के अंदर तक गए। एसएसपी के स्टाफ रूम में स्टाफ से बात करते हुए पूछा कप्तान साहब कहां हैं। स्टाफ ने बताया कि अभी नहीं हैं। यहां से वह एसपी देहात के कक्ष में चल गए। एक एसआई फरियादियों की फरियाद सुन रहे थे। मंडलायुक्त ने पूछा साहब नहीं हैं क्या..। एसआई उन्हें पहचान गया। सीट से खड़ा हो गया, बोला अरे..साहब आप...। मंडलायुक्त ने कहा चुपचाप बैठ जाओ किसी को अभी बताना नहीं है..।
विकास भवन में गोष्ठी में बैठे, सीडीओ की कुर्सी पर जमाया कब्जा
फिरोजाबाद। विकास भवन में करीब एक बजे पहुंचे। किसी भी दफ्तर में उन्हें कोई अधिकारी नहीं मिला। विकास भवन के हाल में लघु सिंचाई विभाग की बैठक चल रही थी वहां भी कोई पहचान नहीं सका। वो चुपचाप पीछे बैठ गए। करीब पांच मिनट यहां बैठे और बाहर निकल आए। यहां से डीपीआरओ कार्यालय पहुंचे डीपीआरओ थे नहीं। सीडीओ नेहा जैन का कक्ष बंद था। सीडीओ कक्ष की कुंडी खोलकर अंदर पहुंचे और उनकी कुर्सी पर बैठ गए। यहां किसी ने उनसे टोकाटोकी नहीं की। यहां से वह समाज कल्याण विभाग और डीडीओ कक्ष का राउंड लेने के बाद एआरटीओ दफ्तर पहुंचे।
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मंडलायुक्त से भी उलझी एआरटीओ नीतू सिंह
दोपहर करीब सवा बजे मंडलायुक्त एआरटीओ दफ्तर पहुंचे। एक कक्ष के बाहर कतार लगी थी। यहां बैठे स्टाफ ने कतार में लग जाने को कहा। अंदर रिकार्ड रूम चेक करते हुए बाहर की तरफ आए तभी एआरटीओ नीतू सिंह भी आ पहुंची। मंडलायुक्त के साथ मोबाइल से फोटो खींच रहे व्यक्ति का मोबाइल खींचने की कोशिश की इसके बाद गेट बंद करने लगीं। मंडलायुक्त ने विरोध किया तो उनसे भी उलझ गईं इस पर उन्हें फटकार दिया। मंडलायुक्त के तेवर दिखाते ही एआरटी नीतू सिंह हक्की-बक्की रह गईं। वह पहचान गईं कि यह मंडलायुक्त हैं। तुरंत बोली..अरे .सर...आप....।
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