फिरोजाबाद। आपसी झगड़े के बाद सीआरपीएफ कर्मी संत कुमार यादव के द्वारा अंधाधुंध फायरिंग कर अपने चार साथियों को मौत के घाट उतारना परिजनों एवं सहपाठियों के गले नहीं उतर रहा है। बीमार मां बोली मेरा बेटा बहुत सीधा है और वो ऐसा कदम नहीं उठा सकता। पिता बोले छुट्टी पर आने को था मेरा बेटा। लेकिन ऐसा कदम उठाने के पीछे कोई अन्य साजिश तो नहीं है।
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर के बासागुड़ा में तैनात सीआरपीएफ की 168 वीं बटालियन में तैनात संतकुमार (35) पुत्र राज किशोर यादव मूलरूप से थाना मटसेना के गांव सिकेहरा का निवासी है। तीन भाइयों में सबसे बड़ा संत 2002 में ही सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था। दो वर्ष पूर्व वह इलाहाबाद में तैनात था। पत्नी संजू देवी, बेटा शिवांक (16) व मोनू (12) भी इलाहाबाद में स्थित सीआरपीएफ कैंप में रहते हैं। संतकुमार के छोटे भाई हरिओम व रामशंकर भी सेना में तैनात हैं।
तीन बेटों के देश सेवा में चले जाने के कारण गांव में बुजुर्ग पिता राजकिशोर यादव व उनकी पत्नी राजनश्री अकेली रहती हैं। पिता राजकिशोर ने बताया कि संत कुमार की मां राजश्री के बीमार होने के कारण तीनों बेटे बारी-बारी से सेवा करने के लिए आते हैं। राजकिशोर बोले की रात्रि में गांव के कुछ लोगों ने बेटे के द्वारा साथियों पर फायरिंग किए जाने की सूचना दी।
मैं तो यह सुनकर खुद ही चौंक गया। मेरे बेटे ने आज तक किसी के थप्पड़ तक नहीं मारा तो फिर वह साथियों पर फायरिंग कैसे कर सकता है। पिता ने बताया कि वह 25 दिसंबर को छुट्टी पर आने की बात अवश्य कह रहा था। हो सकता है कि छुट्टी को लेकर ही कोई बात हुई हो। बेटे से बात होने पर ही कुछ कहा जा सकेगा। शनिवार की रात्रि से ही फोन मिलाने का प्रयास किया था। लेकिन बात नहीं हो सकी।