फिरोजाबाद। सुहागनगरी में कांच उत्पादन बढ़ाने के लिए कई इकाइयां क्षमता के अनुरूप गैस की डिमांड कर रही हैं, लेकिन टीटीजेड की बंदिशों के चलते उनकी राह आसान नजर नहीं आ रही।
टीटीजेड में बढ़ते प्रदूषण के कारण कोयले से संचालित इकाइयां बंद हो गईं। 1996 के बाद नेचुरल गैस से इकाइयों का संचालन हो रहा है। गैल ने जब इकाइयों से अनुबंध किया, तब गैल की शर्तों पूरी नहीं करने पर 200 से अधिक इकाइयां बंद हो गई थीं।
जिन इकाइयों को गैस मिली। उनमें कई इकाइयां ऐसी थीं जिन्हें क्षमता के अनुरूप गैस नहीं मिल सकी। क्षमता के अनुरूप गैस के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली। पर्यावरण मंत्रालय में गत माह हुई बैठक के बाद उद्यमियों को उम्मीद की किरण नजर आई थी।
मंत्रालय के निर्देश पर उद्योग विभाग ने गैस डिमांड करने वाली इकाइयों का डाटा भेजा था। डाटा में हाइकोर्ट के निर्देश के बाद बंद इकाइयां और क्षमता के अनुरूप गैस नहीं मिलने वाली इकाइयां शामिल हैं।
मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई टीटीजेड की बैठक में उद्यमियों ने गैस उपलब्ध कराने का मामला उठाया, लेकिन कोई निर्णय नहीं निकला।