फरसौली गांव के बाहर सूखे पड़े कुएं से नवजात के रोने के आवाज सुनी तो राहगीरों के पैर थम गए। कुएं में झांककर देखा तो दो-तीन दिन का बच्चा पड़ा था। एक राहगीर ने कुएं से नवजात को निकाला। इसी दौरान बात गांव में फैली तो मौके पर भीड़ जुट गई। बच्चे को अपनाने के लिए बहुत लोग सामने आ गए। मामला विधायक के पास पहुंचा तो उन्होंने कुएं से निकालने वाले राहगीर को ही बच्चा सौंप दिया।
तहसील क्षेत्र के गांव फरसौली के जयवीर खेत पर जा रहे थे तभी रास्ते में एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने इस आवाज के सहारे उसे तलाश तो कुएं में एक नवजात पड़ा दिखा। करीब बीस फुट गहरे सूखे कुएं में उतरकर जयवीर ने नवजात को निकाल लिया। नवजात स्वस्थ था। कुएं में बच्चा पड़ा होने की सूचना पर गांव के लोग जुट गए। बच्चे को देख हर किसी की ममता जाग उठी। लोगों में बच्चे की मां के प्रति गुस्सा था। बच्चे को अपनाने के लिए लोगों में होड़ मच गई। मामला विधायक सत्यपाल सिंह राठौर के पास पहुंचा तो उन्होंने बच्चे को जयवीर को सौंप दिया। उन्होंने कहा कि उसी ने बच्चे को निकाला तो उस पर पहला हक भी उसी का है। बच्चे को अपना कर जयवीर और उसकी पत्नी बेहद खुश हुए। मामले को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। यह भी चर्चा रही कि बच्चे को कुएं में फेंकने पर भी उसे चोट क्यों नहीं आई। लोग यह भी अंदाजा लगा रहे थे कि बच्चे को कुएं में उतरकर या रस्सी आदि के सहारे रखा गया होगा।
बेटा पाकर खुश हुआ दंपति
कुएं मिले नवजात को अपनाकर जयवीर और उसकी पत्नी कीर्ति की खुशी का ठिकाना नहीं है। कीर्ति ने बताया कि उनके दो बेटियां हैं, अब एक बेटा भी मिल गया। भगवान ने उनकी सुन ली और एक बेटा दे दिया। उनका कहना है कि वह इसकी अच्छी तरह परवरिश करेंगे। उनकी बेटियां भी भाई पाकर बहुत खुश होंगी।