स्वाइन फ्लू की जांच के लिए पीड़ित के परिवार को सैफई अस्पताल में भेजा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने एंबुलेंस से सात लोगों जांच के लिए भेजा है। इनमें दो पड़ोसी भी शामिल हैं। जांच रिपोर्ट दो दिन बाद मिलेगी। लोग स्वाइन फ्लू से इतने डरे हुए हैं कि सर्दी-जुखाम होने पर भी जांच के लिए अस्पताल में पहुंच रहे हैं।
चूड़ी कारोबारी की पत्नी और बच्ची को स्वाइन फ्लू होने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप है तो लोग डरे हुए हैं। हालांकि पीड़ित महिला और उनकी बेटी को समय पर इलाज मिलने से हालत में सुधार है। परिवार के अन्य पांच सदस्यों को सैफई भेजा गया। वहीं, पड़ोस में रहने वाले दो अन्य लोगों को खांसी, जुकाम था, स्वास्थ्य विभाग ने उनकी भी जांच सैफई मेडिकल कालेज में कराई है। सुहागनगरी में केस मिलने से लोगों में जागरूकता आई है। अगर किसी को खांसी-जुकाम हो रहा है तो भी वो चिकित्सक पर इलाज के लिए जा रहा है। जिला अस्पताल में भी कई ऐसे मरीज पहुंचे। हालांकि चिकित्सकों को कोई रिपोर्ट नहीं मिली।
पशु चिकित्सा विभाग के चिकित्सक डा. सुनील सिंह ने बताया कि इसे स्वाइन इंफ्लुएंजा कहते हैं। यह एक वायरस डिसीज है। जो एचएन वायरस से होती है। मौसम में अचानक बदलाव के कारण यह बीमारी फैलती है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
नाक का लगातार बहना, खांसी होना, गले में खराश, तेज बुखार व सिर में तेज दर्द, मांस पेशियों में दर्द व अकड़न।
स्वाइन फ्लू का वायरस हवा के साथ ट्रांसफर होता है। खांसने, छींकने, थूकने से यह वायरस बीमार आदमी से स्वस्थ आदमी में पहुंचता है। इसके कारण बीमार व्यक्ति से उचित दूरी बनाकर रखें।
चिकित्सा--
मरीज को आराम करना चाहिए, खूब पानी पीना चाहिए तथा बुखार कम करने के लिए पैरासीटामोल दवा दी जाती है। बीमारी के बढ़ने पर ओसेल्टामिविर (टैमी फ्लू) तथा जानी मिविर (रैलेंजा) दवा से इलाज किया जाता है। बिना डाक्टर की सलाह के दवाओं का प्रयोग नहीं करें।
बचाव-
पीड़ित व्यक्ति के हाथों को साबुन से धुलना चाहिए। खांसते समय टिशू पेपर का प्रयोग करें।