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अमोनिया का रिसाव : आइस फैक्टरी के आसपास बसे मोहल्लों में अभी भी दहशत

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अस्पताल में इलाज कराते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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मथुरा। महानगर के वार्ड संख्या 51 में नगला चंद्रभान कालोनी में दूसरे दिन भी अमोनिया गैस की दहशत फैली रही। फैक्टरी के आसपास के लोग तो घर जाने से भी कतराते रहे। लोगों को डर था कि गैस का रिसाव फिर से हो सकता है। यहां रहने वालों की मानें तो वह कई दफा इस फैक्टरी के बारे में शिकायत कर चुके हैं लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। हर बार लोगों को कोरा आश्वासन देकर शांत कर दिया जाता है।
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नगला चंद्रभान इलाके में आइस (बर्फ) फैक्टरी से अमोनिया गैस का रिसाव हो जाने के कारण 34 लोगों की हालत बिगड़ गई थी। इनमें किसी को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी तो किसी को चक्कर आने लगे। आंखों में जलन हो रही थी। इनमें से कुछ को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था तो कुछ को निजी अस्पतालों में। दूसरे दिन जिन लोगों की तबीयत सुधर गई उन्हें तो घर भेज दिया गया जबकि जिला अस्पताल में लोग अभी भी भर्ती हैं। उनका इलाज चल रहा है।

डाक्टरों का कहना है कि हालत में तेजी के साथ सुधार हो रहा है। वहीं, नगला चंद्रभान इलाके में दूसरे दिन भी दहशत फैली रही। स्थिति यह थी कि जिन लोगों के घर फैक्टरी के आसपास बसे थे वह तो घर जाने में भी कतरा रहे थे। हालांकि मुहल्ले के कुछ लोग माहौल को सामान्य बनाने के लिए लोगों को समझा रहे थे।
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उन्हें बताया जा रहा था कि गैस का रिसाव अब नहीं होगा। वॉल्व को बंद कर दिया गया है। लेकिन फिर भी घबराहट थी। कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि फैक्टरी के आबादी से बाहर शिफ्ट किया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। कुछ लोगों ने मुआवजा दिलाने की भी मांग की है। लोगों ने बताया कि हजारों रुपया इलाज में खर्च हो गया है। लोगों के पास जो जमा पूंजी थी वह सब लग गई। प्रशासन को चाहिए कि बीमार लोगों को तत्काल मुआवजे की व्यवस्था कराई जाए।

डीएम ने जांच के आदेश दिए, तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपेंगे
मथुरा। आइस फैक्टरी से अमोनिया गैस के रिसाव के कारण जब 34 लोग बीमार पड़े तब जाकर प्रशासन की नींद टूटी है। आनन-फानन में फैक्टरी को बंद करा दिया गया है। डीएम ने श्रम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं। तीन दिन के भीतर जांच पूरी करनी होगी। इसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सभी मानक चेक किए जा रहे हैं। अगर पाइप लाइन पुरानी थी तो उसे बदला क्यों नहीं गया। एसडीएम सदर क्रांति शेखर सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं। दो विभागों के अफसरों को जांच के लिए लगाया गया है। तीन दिन के भीतर जांच पूरी करनी होगी। वहीं स्थानीय लोगों के भी बयान लिए जाएंगे। यह भी देखा जा रहा है कि क्या पहले भी कभी इस फैक्टरी से गैस के रिसाव की घटना सामने आई है। यहां के लोगों ने फैक्टरी को शिफ्ट करने की मांग कब-कब उठाई इस बिंदु को भी देखा जा रहा है।
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