कासगंज। सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल माने जाने वाले कासगंज नगर को आखिर किसकी नजर लग गई। जो यकायक शहर जल उठा। चारों और दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। हालात एक साथ इतने बिगड़ जाएंगे इसका किसी को एहसास नहीं था। लोग अचंभित हैं और शांति की अपील भी कर रहे हैं।
कासगंज के इतिहास में इतनी बड़ी हिंसक घटनाएं कभी नहीं हुईं। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि जिससे देखते ही देखते अमन की मिसाल बना शहर नफरत की आग में जल उठा। इस विवाद में जान-माल का नुकसान भी हुआ। आखिर ऐसे हालात क्यों पैदा हुए। यहां पर ईद हो या होली सभी त्योहारों को एक-दूसरे समुदाय के लोग साझा तरीके से मनाने के आदी रहे हैं। शांति कमेटी की बैठकों में हमेशा ऐसे ही नजारे आए हैं, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। लोग सहमे हुए हैं। प्रशासन भी अशांति को दूर करने के लिए कोशिशें कर रहा है। दोनों समुदाय के लोगों से मुलाकात करके शांति की अपील की जा रही है। कमिश्नर सुभाष शर्मा का कहना है कि प्रशासन पूरी तरह से सद्भाव का माहौल बनाने के लिए प्रयास कर रहा है।
कांग्रेस की जिलाध्यक्ष डा. शशिलता चौहान ने भी अपील की है कि लोग शांति व्यवस्था बनाकर रखें। उन्होंने अभिषेक की मौत पर गहरा दुख जताया और घटना की निंदा की।
समाजवादी पार्टी के पूर्व परिवहन राज्य मंत्री मानपाल सिंह ने कहा कि शहर में अमन चैन न बिगड़ने दें। उन्होंने भी मृतक युवक की मौत पर गहरा दुख जताया और घटना की निंदा की।
चिकित्सक डा. लायक अली ने कहा कि दोनों समुदाय के लोगों के बीच सौहार्द प्रभावित हो रहा है। इसके लिए शीघ्र ही दोनों पक्षों की वार्ता होनी चाहिए। जिससे सद्भाव का माहौल बन सके।