नगर में बिगड़े हालातों के लिए पुलिस प्रशासन की नासमझी भी सामने आई। जिले में एडीजी, 2 आईजी, कमिश्नर, जिले के पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों, 5 कंपनी अर्ध सैनिक बल, पीएसी, जिले की पुलिस फोर्स एवं की मौजूदगी के बाद बिगड़े हालातों के दूसरे दिन आगजनी की कई घटनाएं हुईं, जो सुरक्षा प्रबंधों की चूक का परिणाम नजर आईं। वहीं पुलिस प्रशासन 5 दिन पहले से चामुंडा मंदिर पर बैरीकेड लगाने के विवाद से दोनों समुदायों में पैदा हो रही बदअमनी को भी नहीं भांप पाया।
गौरतलब है कि शुक्रवार को तिरंगा यात्रा के विवाद के बाद सांप्रदायिक हिंसा फैल गई। जगह-जगह आक्रोश के हालात बने हुए थे। पुलिस और प्रशासन के तमाम जिम्मेदार अधिकारी भी शहर में पहुंच चुके थे। अर्धसैनिक बल, आरएएफ, पीएसी व आस पास के कई जनपदों को फोर्स व अधिकारी आ चुके थे। अधिकारियों और सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बाद लग रहा था कि शनिवार का दिन शांति वाला होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। शनिवार को जबरदस्त आक्रोश के हालात बन गए। लोग सड़कों पर उतर आए। लोगों की भीड़ के बीच में अराजक तत्व अपने मंसूबे पूर करने में जुट गए। पुरानी चुंगी इलाके में तीन वाहनों में आगजनी कर दी। खोकों में आग लगा दी और तोड़फोड़ की। वहीं मुख्य बाजार बाराद्वारी इलाके में 5 दुकानों पर आगजनी की घटना हो गई। इसके बाद अमांपुर रोड इलाके में भी 3 दुकानों में आग लगा दी। शहर में पनप रहे आक्रोश को पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी नहीं भांप पाए। यदि प्रशासन ने सतर्कता के साथ इन स्थानों पर सुरक्षा का विशेष ध्यान होता तो शायद ऐसी स्थिति नहीं होती।
दोनों समुदाय के बीच बदअमनी का कारण पांच दिन पहले से बना हुआ था। नगर के चामुंडा मंदिर पर पुलिस प्रशासन ने बैरीकेड लगाकर वाहनों का प्रवेश रोक दिया था। इस बात को लेकर दूसरे समुदाय के लोगों ने विरोध जताया था। प्रशासन ने मंदिर पर सुरक्षा तो कर दी, लेकिन बदअमनी के हालात को नहीं भांप पाया।
कमिश्नर सुभाष शर्मा का कहना है कि कहां किस स्तर पर चूक हुई है। इस बात की भी जांच की जा रही है।