एटा। महिला हेल्प लाइन में पहुंचने वाली महिलाओं को महीनों चक्कर लगाने के बाद भी न्याय नहीं मिल पा रहा। इसे लेकर महिला हेल्प लाइन महज खानापूर्ति तक सिमट रही है। हेल्प लाइन में समझौता न होने के चलते फरियादियों की संख्या लगातार घटती जा रही है।
पुलिस लाइन में रविवार को दंपतियों के बीच होने वाले टकराव और उसमें समझौते के लिए महिला हेल्प लाइन का आयोजन किया जाता है। इसमें पिछले समय टूटे हुए परिवारों के बीच काफी संख्या में समझौते हुए है। मौजूदा समय में यह हेल्प लाइन महिलाओं के कारगर साबित नहीं हो पा रही है। रविवार को आयोजित हुई हेल्प लाइन में पहुंची महिला मिथलेश निवासी कुसाडी, नीरज निवासी शिवसिंहपुर, प्रियंका निवासी घमुरिया रिजोर ने बताया कि उन्हें पति और ससुरालियों ने दहेज और रंगभेद के चलते मारपीट कर घर से निकाल दिया है।
जिसे लेकर उन्होंने न्याय पाने के लिए महिला हेल्प लाइन में शरण ली थी। पिछले दो से तीन रविवार को वह महिला हेल्प लाइन में परिजनों के साथ पहुंची है। लगातार हेल्प लाइन के चक्कर काटने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।
हेल्प लाइन पहुंची पीड़ित महिलाओं ने बताया कि हर बार वे ही पुलिस लाइन में पहुंचती है, जबकि ससुराल पक्ष से कोई भी व्यक्ति नहीं आता। जिस पर हेल्प लाइन में मौजूद लोग उनसे अगली तारीख पर आने की कह चलता कर देते है। इस तरह से जिले में आयोजित होने वाली महिला हेल्प लाइन महिलाओं के लिए कारगर साबित होती नजर नहीं आ रही।
वही महिला थाना प्रभारी कंचन कटियार ने बताया कि हेल्प लाइन में अधिकांश पक्षों में समझौते होते हैं। महिलाओं की दूर दराज में ससुराल होने के कारण दूसरा पक्ष हेल्प लाइन में देरी से पहुंचता है।