4.50 करोड़ का माल बरामद
दो दिन तक दवाओं की गिनती की गई। फैक्टरियों में पशुओं की नकली दवा के साथ मशीन, पैकिंग का सामान सहित 4.50 करोड़ का माल बरामद किया गया था। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि अश्वनी गुप्ता ने गजानन नगर, लोहामंडी निवासी सारिक खान से मैरिज होम 17 हजार रुपये महीने किराये पर लिया था। साैरभ दुबे ने कमलेश देवी के मकान में भूतल किराये पर लिया था। इसके लिए हर महीने 10 हजार रुपये देता था। अश्वनी की फैक्टरी में सारंगपुर, फतेहाबाद का उस्मान खान दवा बनाता था। वह बारहवीं पास है। दवाओं में कच्चे माल की मात्रा कितनी रखनी है? काैन सी गोली और सीरप किस मात्रा में बनना है? यह सब उस्मान तय करता था। रसायन का मिश्रण बनाने के बाद टैंकर में खुद ही डालता था। दवा तैयार होने पर महिला श्रमिक कार्टन में पैकिंग करती थीं। इन्हें 5-5 हजार रुपये संचालक देते थे। थाना सिकंदरा के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि उप निरीक्षक बबलू पाल ने मुकदमा दर्ज कराया। मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
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जीजा-साले का नेटवर्क खंगाल रही पुलिस
पुलिस ने साैरभ और अश्वनी के मोबाइल कब्जे में लिए हैं। इनकी काॅल डिटेल खंगाली जा रही है। व्हाट्सएप चैट की भी जांच होगी। पता चला है कि आरोपी अपने एजेंटों के माध्यम से दवाओं को बाजार में बेचते थे। उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, गुजरात, राजस्थान में भी सप्लाई थी। कई जगह डिस्ट्रीब्यूटर भी बनाए थे। इनके माध्यम से अफ्रीकी देश अंगोला और अफगानिस्तान तक दवाएं जा रही थीं। पुलिस को स्थानीय स्तर पर भी कुछ एजेंटों के नाम पता चले हैं। डिस्ट्रीब्यूटरों पर भी शिकंजा कसेगा।
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ऑर्डर देने वाले नहीं आ रहे सामने
पुलिस ने बताया कि दोनों फैक्टरियों में हर महीने लाखों के ऑर्डर आ रहे थे। डिस्ट्रीब्यूटरों से 40 प्रतिशत भी मिल रहा था। अक्तूबर में भी दवाओं के ऑर्डर आए थे। पुलिस के छापे के बाद अश्वनी और साैरभ से डिस्ट्रीब्यूटरों से संपर्क नहीं किया है। पुलिस का अनुमान है कि पकड़े जाने के डर से कोई सामने नहीं आ रहा है। पुलिस को दोनों जगह से बड़ी मात्रा में पैक दवाएं भी मिली हैं, जिनकी सप्लाई की जानी थी।
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