मैनपुरी। नवीन मंडी में करोड़ों की भूमि को कौड़ियों के दामों में दलालों ने दबंगों के हवाले कर दिया। मंडी प्रशासन की चुप्पी इस बात की गवाह है कि कहीं न कहीं इन दलालों को भी मंडी समिति का संरक्षण प्राप्त था। मामला सामने आने के बाद अब मंडी प्रशासन में भी खलबली मच गई है।
नवीन मंडी में बड़े पैमाने पर खेल हुआ। करोड़ों रुपये की कीमत की सरकारी जमीन पर दबंगों को कब्जा करा दिया गया। ये कब्जा एक दिन या एक महीने में नहीं हुआ, बल्कि सालों से ये खेल चला आ रहा है। मंडी में एक दुकान की नीलामी लाखों रुपये में होती है। ऐसे में व्यापारियों को भी बड़ी रकम मंडी समिति को अदा करानी पड़ती है। वहीं, दलालों से मिलकर ये जमीन उन्हें कुछ रुपयों में ही मिल गई। नाम न छापने की शर्त पर कुछ व्यापारियों ने बताया कि इन दुकानों के लिए रुपये लेने वाले दलालों को मंडी समिति का संरक्षण प्राप्त है।
इसके चलते खुलेआम मंडी में दबंग कब्जा करते रहे और मंडी प्रशासन आंखें मूंदकर उसे अनदेखा करता रहा। मंडी समिति की जिम्मेदारी का अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि बीते एक सप्ताह से इन्हीं कब्जों को लेकर मंडी अखाड़ा बनी हुई है। ये मामला शंात कराने के लिए एसडीएम और सीओ को जाना पड़ा। इसके बाद भी अब तक मंडी प्रशासन ने इन कब्जों के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की है। इससे साफ है कि मंडी प्रशासन की इन कब्जों को हटवाने की कोई मंशा नहीं है।
परिसर में ही है मंडी समिति का कार्यालय
मंडी में कोई गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा न हो इसीलिए परिसर में ही मंडी समिति का कार्यालय बनाया गया है। यहां मंडी सचिव से लेकर मंडी निरीक्षक व अन्य कर्मचारी रोजाना बैठते हैं। इसके बाद भी क्या आते जाते या निरीक्षण के दौरान कभी किसी कर्मचारी ने इन कब्जों को नहीं देखा। अगर देखा तो आज तक इन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
भाजपाइयों ने डीएम से की थी शिकायत
नवीन मंडी में कब्जों का मामला अब मंडी तक ही सीमित नहीं रहा है। उच्चाधिकारियों से लेकर किसानों तक सबको इसकी जानकारी है। दो दिन पहले ही फूडग्रेन कमीशन एजेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूप मिश्रा ने भाजपा जिलाध्यक्ष आलोक गुप्ता और अन्य भाजपाइयों के साथ डीएम से मामले की शिकायत की थी। डीएम ने उप जिलाधिकारी को मामले में जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
मंडी सचिव अवकाश से वापस आ गए हैं। सोमवार को उनसे मंडी में कब्जों को लेकर बात की जाएगी। उनसे पूछा जाएगा कि आखिर ये कब्जे कैसे हो गए। इसके बाद ही कार्रवाई की तैयारी की जाएगी।
अशोक कुमार, एसडीएम सदर।