एटा। जिला अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों के खाने से खिलवाड़ हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के आधार पर पिछले साल 128 कुपोषित बच्चों के खाने पर 7.5 लाख रुपये खर्च किए गए। जबकि कुपोषित बच्चों को पोषण देने के लिए केंद्र पर कोई मेन्यू नहीं है। रसोई खाली पड़ी है और कर्मचारियों के पास इसका कोई जवाब नहीं है। हालात बता रहे हैं के पोषण के नाम पर बीते साल खुली लूट की गई है।
पोषण पुनर्वास केंद्र के हालात बद से बदतर हो रहे हैं। यहां पर न तो माताओं के लिए कोई विशेष सुविधाएं हैं और न कुपोषित बच्चों के लिए। प्रभारी खानपान की व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं देते हुए ओपीडी में समय देते हैं। कहने को तो केंद्र पर सात कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन ड्यूटी पर कभी-कभार ही देखने को मिलते हैं। लंबे समय से परामर्शदाता केंद्र पर नहीं हैं। न्यूट्रीशियन के नाम पर पद रिक्त चल रहा है। पोषण पुनर्वास केंद्र पर कुपोषित बच्चों को पोषण के नाम पर सिर्फ सूखा दूध दिया जा रहा है।
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रसोई में यह होनी चाहिए व्यवस्था
एनआरसी की रसोई पूरी तरह से खाली पड़ी हुई है। जबकि बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिए रसोई में दूध, दही, चना, राजमा, दलिया, लौकी, गोभी, अंडा, पत्ता गोभी, तेल, मक्खन, हलवा आदि की व्यवस्था होनी चाहिए।
एनआरसी को लेकर समीक्षा बैठक की गई है। पिछली व्यवस्थाओं में बदलाव करते हुए रसोई में मेन्यू के आधार पर सुधार करने के निर्देश दिए हैं। रोस्टर प्लान चालू करा दिया है, जिस पर सभी कर्मचारियों के नंबर अंकित किए जाएंगे। कुपोषित बच्चों को मेन्यू के आधार पर खानपान चिकित्सक की सलाह पर दिया जाएगा।
- डा. प्रदीप कुमार गुप्ता, सीएमएस
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जिले में यह है कुपोषण का हाल
परियोजना कुपोषित अति कुपोषित
अलीगंज 2153 369
जलेसर 1344 187
मारहरा 1442 252
सकीट 1800 322
जैथरा 1619 329
अवागढ़ 1138 263
निधौलीकलां 1425 407
शीतलपुर 2243 408
एटा शहर 578 100
कुल 13742 2637
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आंकड़े
128 बच्चों को केंद्र में पिछले साल खिलाया गया खाना।
7.5 लाख रुपये खर्च करने का दावा।
13742 बच्चे हैं जिले में कुपोषित।
2673 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी में।