मथुरा। भगवान न करे कि ट्रेन में सफर के दौरान किसी की तबीयत बिगड़े। अगर बीमार हो गए तो इलाज मिल पाना बड़ा मुश्किल होगा। मथुरा जंक्शन पर तो एक एंबुलेंस तक नहीं रहती। रेलवे अस्पताल तो बस नाम मात्र का ही है। ट्रेन में बीमार पैसेंजरों को किसी तरह से जिला अस्पताल में भिजवाया जाता है। यह स्थिति तो उस जंक्शन की है जिस पर हर रोज हजारों लोग आते हैं।
मथुरा जंक्शन देश के बड़े स्टेशनों में शामिल है। इस स्टेशन पर हर रोज बीस पंद्रह हजार टिकट बिकते हैं। भगवान कृष्ण की नगरी का स्टेशन होने के कारण बड़ी संख्या में कृष्ण भक्त पहुंचते हैं। लेकिन सुविधाओं के मामले में बहुत पीछे है। इमरजेेंसी सेवाएं और हेल्पलाइन भी बस नाम मात्र की ही हैं। होना तो यह चाहिए कि जंक्शन पर एक डाक्टर, मेडिकल स्टाफ और एंबुलेंस की उपलब्धता हर वक्त होनी चाहिए। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।
अगर किसी पैसेंजर को तबीयत खराब होने पर मथुरा जंक्शन पर उतारा जाता है तो उसे किसी तरह जिला अस्पताल पहुंचा दिया जाता है। क्योंकि रेलवे अस्पताल तो केवल नाम का ही रह गया है। न डाक्टर हैं और न दवा।
ट्रेनों की नहीं मिलती जानकारी
ट्रेनों की स्थिति का पता करने के लिए 135 और 138 हेल्पलाइन है। 135 को आईआरसीटीसी ने कंप्यूटर से जोड़ दिया है। 138 पर ट्रेनों की जानकारी नहीं मिलती है। अधिकारी कहते हैं कि तकनीक का जमाना है। इंटरनेट पर सभी ट्रेनों की स्थिति उपलब्ध रहती है। गूगल के माध्यम से ट्रेन के बारे में पल पल की जानकारी मिल जाती है।
इन नंबरों पर हासिल करें मदद
100 नंबर पुलिस से मदद हासिल करने के लिए।
1090 महिलाओं की मदद के लिए।
182 ट्रेन में मदद हासिल करने के लिए।
2211-12 ट्रेन में यात्री सुविधा हासिल करने के लिए।
1098 चाइल्ड हेल्पलाइन।