एटा। जिले में मानकों की अनदेखी करके स्कूल वाहनों को दौड़ाया जा रहा है। वाहनों में न तो अग्निशमन यंत्र हैं और न ही फर्स्टएड किट। ज्यादातर वाहनों की तो फिटनेस और इंश्योरेंस भी एक्सपायर हो चुका है। क्षमता से कई गुना बच्चों को भरकर ले जा रहे हैं। इतना होने के बाद भी परिवहन विभाग के अधिकारी आंखें बंद करके बैठे हैं। जबकि जिले में कई बड़े हादसे हो चुके हैं। बावजूद इसके अधिकारी कोई सबक नहीं ले रहे।
अधिकारियों की अनदेखी और लापरवाही नौनिहालों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है। मानकों को ताक पर रखकर खटारा वैन और बसों को स्कूलों में चलाया जा रहा है। लगातार स्कूलों वाहनों से हो रहे लगातार हादसों के बाद भी अधिकारी कोई एक्शन नहीं ले रहे। आठ सीटर वैन में 20 से अधिक बच्चों को भरकर उनकी जिंदगी को जोखिम में डाल रहे हैं। जबकि वाहन फीस के नाम पर स्कूल संचालक अभिभावक से मोटी रकम वसूल रहे है। सूत्रों की माने तो इन स्कूलों में लगे वाहनों में से आधे तो पंजीकरण ही नहीं।
प्रतिबंधित वाहन भी ले जा रहे स्कूली बच्चे
शासन स्तर से ओमनी कार जैसे वाहनों को प्रतिबंधित करते हुए स्कूली बच्चो को लाने ले जाने से रोका है। बावजूद यह वाहन बच्चों को ढो रहे हैं। वाहन चालक ऐसे वाहनों में गैस किट लगाकर वाहन चला रहे है।
अलीगंज में हो चुका है हादसा
पिछले साल अलीगंज में हुए स्कूली बस हादसे में बारह स्कूली बच्चों की मौत हो गई। इसके बाद शहर के रेलवे पुल समीप ओमनी कार में बच्चों को ले जाते समय आग लगने की घटना हो चुकी है।
पंजीकरण से डेढ़ गुने दौड़ रहे वाहन
एटा। जिले भर में पंजीकरण से भी डेढ़ गुने स्कूली वाहन दौड़ रहे है। ग्रामीण क्षेत्र और कस्बों में संचालित स्कूलो में मौजूद वाहनों का संभागीय विभाग में पंजीकरण नहीं है। विभाग की माने तो 145 स्कूली बसों के साथ लगभग 200 वाहनो का पंजीकरण है। जबकि मौजूदा समय में पंजीकरण के डेढ़ गुनी संख्या में स्कूली बच्चों को ढो रहे है। पिछले दिनों फिटनेश परीक्षण में भी एक दर्जन वाहन अनफिट पाए गए थे।
एआरटीओ लक्ष्मण सिंह से जब इस संबंध में बात की गई तो वह किसी भी तरह का कोई जवाब नहीं दे पाए। इतना ही नहीं कार्यालय में भी वाहनों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दे पाया। ऐसे में खुद व खुद अंदाजा लगाया जा सकता है कि एआरटीओ कार्यालय में किस तरह से वाहनों के पंजीकरण को लेकर खेल चल रहा है।
आंकड़ों में नजर
145 से अधिक है स्कूली बसों की संख्या
50 से ज्यादा मैजिक और कार
24 से अधिक है शहर में निजी विद्यालय
34 स्कूली वाहनों ने कराया था फिटनेस परीक्षण
12 से अधिक अनफिट पाए गए थे वाहन
क्या हैं मानक
- स्कूल के लिए स्वीकृत वाहन अन्य किसी प्रयोग में नहीं लाए जाएंगे।
- 250 गुणा 250 मिमी काले बड़े अक्षरों में स्कूल कैब लिखा होना चाहिए।
- घोषित सीट क्षमता से डेढ़ गुना छात्रों को ही ले जा सकते हैं।
- चालक की समस्त डिटेल और उसका चरित्र प्रमाण पत्र अनिवार्य है।
- वाहन में रजिस्टर रखा जाएगा, जिसमें बच्चों का ब्योरा और उनके अभिभावकों का कांटेक्ट नंबर होगा।
- ऐसा चालक स्कूली वाहन नहीं चला सकता, जिसने वर्ष में दो बार यातायात नियमों को तोड़ा हो।
- वाहन की बैक लाइट, इंडीकेटर समेत अन्य उपकरण सही तरीके से काम कर रहे हों।
यह है सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइंस
- स्कूली बसों में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की व्यवस्था।
- बसों में अग्निशमन उपकरण।
- एजेंसी से अनुबंधित बसों में आन स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
- चालक को पांच साल का भारी वाहन चलाने का अनुभव। सत्यापन भी हो।
- चालक के साथ एक सहायक चालक भी होना चाहिए।
- बस में एक शिक्षक भी चलना चाहिए, जोकि बच्चों पर नजर रख सके।