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बिन पहरेदार, कैदी फांदेंगे दीवार, अब तो चेतो सरकार

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थाने में बच्चे से थर्ड डिग्री
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मैनपुरी।
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मथुरा जिला कारागार से बंदियों के भागने के बाद प्रदेश भर में अलर्ट किया गया है। वहीं,मैनपुरी जिला कारागार में आधुनिक संसाधान, सुविधाएं तो हैं, लेकिन सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिसकर्मियों की कमी है। साथ ही महिला आरक्षी भी नहीं हैं।


इस वजह से बंदियों से मिलने आने वाली महिलाओं की तलाशी का जिम्मा महिला होमगार्ड निभा रहीं हैं। जेलर का पद भी काफी समय से रिक्त चल रहा है। डिप्टी जेलर ही चार्ज देख रहे हैं। अब आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि सुरक्षाकर्मियों की कमी से जूझ रहे जिला कारागार में सुरक्षा व्यवस्था कितनी चुस्त दुरुस्त होगी।
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जेल प्रशासन के पास बंदियों को रखे जाने के लिए बैरकों की समस्या काफी समय से परेशानी बढ़ाने का काम कर रही है। वहीं आरक्षियों की कमी भी सुरक्षा के लिहाज एक बड़ी उलझन बन चुकी है। जिला कारागार में मुख्य आरक्षी व आरक्षी समेत कुल 83 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में कुल 50 पुलिसकर्मी ही तैनात हैं।


जो जेल के अंदर व बाहर सुरक्षा की कमान संभालते हैं। तीन डिप्टी जेलर हैं, वहीं काफी समय से जेलर का पद रिक्त चल रहा है। वर्तमान में इसका चार्ज डिप्टी जेलर ही देख रहे हैं। महिला आरक्षियों की तैनाती न होने के चलते महिला होमगार्ड तलाशी आदि लेने का काम करती हैं।


दूसरा विभाग होने के चलते अधिकारी भी तलाशी प्रक्रिया को लेकर होमगार्ड की लापरवाही को बर्दाश्त करने के अलावा कुछ भी नहीं कर सकते। जेल में पुरुष होमगार्ड की भी तैनाती नहीं हैं। जेल प्रशासन की ओर से और होमगार्ड की मांग की गई है, लेकिन अभी तक इसका भी जवाब नहीं मिला है।

जेल में क्षमता से अधिक हैं बंदी
जिला कारागार की स्थापना सन 1850 में हुई थी। मुख्य प्राचीर की लंबाई 1130 मीटर है। जेल में कुल 498 बंदियों को रखे जाने की ही क्षमता है, लेकिन वर्तमान में कारागार की 13 बैरकों में करीब 1158 बंदी हैं। प्रशासन की ओर से 10 बैरकों का निर्माण कार्य चल रहा है। इनकी क्षमता प्रति बैरक करीब 30 है।
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आरक्षियों और मुख्य आरक्षियों की कमी है, वहीं महिला आरक्षी भी नहीं हैं। होमगार्ड के लिए मांग की गई है। पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद जेल में बंदियों की सुरक्षा में कोई कमी नहीं है। बंदियों की हर गतिविधि पर निगरानी रखी जाती है। इसके लिए सीसीटीवी भी लगे हुए हैं।
-हरिओम शर्मा, जेल अधीक्षक

केस-1
अप्रैल 2017 में होली के दिन जब सभी त्योहार में व्यस्त थे। तभी चार बंदी जिला कारागार की दीवार फांदकर भाग गए थे। कई महीनों तक पुलिस तलाश करती रही, लेकिन उनके बारे में कोई जानकारी नहीं लग सकी थी। वर्तमान में फिरोजाबाद व अलग-अलग स्थानों पर तीन भागे हुए बंदी पकडे़ जा चुके हैं। वहीं एक बंदी डा. राजेंद्र अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है।


केस-2
जिला कारागार में करीब 13 वर्ष पूर्व तीन बंदी जेल की दीवार पर चढ़ गए थे। बाहर से सीढ़ी के रास्ते होकर तीनों भाग निकले थे। इस दौरान एक बंदीरक्षक भी हमले में घायल हो गया था।
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केस-3
करीब छह वर्ष पूर्व एक हत्या के मामले में दीवानी पर पेशी पर आए दो सगे भाइयों ने सिपाही अजय यादव की हत्या कर दी थी। इसके बाद मारुति वैन से भाग निकले थे। कई महीनों की तलाश के बाद आरोपी मुंबई से पकडे़ जा सके थे।
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