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तीर्थनगरी: चारों दिशाओं में शिव के चार स्वरूपों के प्राचीन मंदिर

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प्राचीन शिव मंदिर।
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सोरों (कासगंज)। तीर्थनगरी सूकर क्षेत्र में चारों दिशाओं में भगवान शिव के 4 स्वरूपों के मंदिर हैं। ये शिव मंदिर श्रद्धालुओं के बीच जप तप और साधना का केंद्र है। तीर्थनगरी के पूरब में दूधेश्वर, पश्चिम में योगेश्वर, दक्षिण में रूपेश्वर एवं उत्तर दिशा में भूतेश्वर मंदिर हैं।
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तीर्थनगरी के योग मार्ग स्थित योगेश्वर मंदिर का अपना इतिहास है। ये मंदिर राम नाम लेखन कार्य के लिए जाना जाता है। राजा सोमदत्त सोलंकी ने सूकर क्षेत्र को अपने राज्य की राजधानी बनाकर शासन किया और चारों दिशाओं में शिव मंदिर बनवाए। इन मंदिरों में शिव परिवार, मां गंगा और भैरों भगवान की प्राचीन मूर्तियां पत्थरों पर उकेरी गईं हैं। मूर्तियों में अद्भुद कला देखने को मिलती है। पौराणिक मान्यता है कि योगेश्वर मंदिर में जप तप साधना करने वाले श्रद्धालु मृत्यु के बाद श्वेत दीप को जाता है। मंदिर में 150 वर्ष पूर्व राजस्थानी बाबा जयराम ने कठिन साधना कर हनुमान की सिद्धि प्राप्त की थी। मंदिर में प्राचीनकालीन हनुमान प्रतिमा की पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालु दूर से आते हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त गंगा की धार से कांवड़ लाकर शिव का अभिषेक करते हैं। श्रावण मास में एवं शिवरात्रि पर्व पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। यहां राम नाम लेखन का संग्रहालय है। मंदिर की देखरेख करने वाले पंडित घनश्याम शास्त्री का कहना है कि योगेश्वर मंदिर सिद्ध स्थान है। जहां श्रद्धालुओं के कष्ट दूर होते हैं।
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