जिले के 36 सरकारी विभाग जीएसटी में पंजीकरण बीस जुलाई के बाद होगा। वाणिज्य कर विभागों के टेन नंबर (टैक्स डिडक्शन कलेक्शन अकाउंट नंबर) हाई कमान को भेज दिए हैं। अफसरों की माने तो ऐसे व्यापारी जिनका जीएसटी में पंजीकरण होने के साथ प्रोविजनल आईडी नहीं आई उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। ऐसे व्यापारी पुराने ढंग से काम करें, लेकिन बिल पर जरूर लिखें कि अभी तक प्रोविजन आईडी नोट नहीं मिली है।
जीएसटीएन के नोडल अधिकारी संजय मेहरोत्रा ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद बताया कि अब सरकारी विभागों का जीएसटी में माइग्रेशन बीस जुलाई के बाद होगा। तब सभी सरकारी विभाग पहले की तरह काम करेंगे। उनके टेन नंबर की सूची हाईकमान को भेज दी गई है। जिन व्यापारियों को अभी तक जीएसटी की प्रोविजनल आईडी नहीं मिली है। उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। व्यापारी पुराने तरीके के काम करें, लेकिन आईडी नहीं मिलने की बात बिल पर जरूर लिखें। उन्होंने बताया कि प्रोविजनल आईडी आने पर व्यापारियों को दोबारा ई-बिल बनाना होगा और कोई समस्या भी नहीं आएगी। जिन विभागों के टेन नंबर हाईकमान को भेजे गए हैं उनके शिक्षा, स्वास्थ्य, पीडब्लूडी, आरईएस, जल निगम, सिंचाई एवं जल निगम और पावर कारपोरेशन समेत 36 विभाग शामिल हैं।
बिलिंग प्रारूप बदला, टिन नहीं जीएसटी नंबर लिखें
एटा। जीएसटी के तहत बिलिंग का प्रारूप भी बदला है। अब क्रेता-विक्रेता पूर्व टिन नंबर वाली रसीदों पर लेन-देन नहीं कर सकेंगे। नई व्यवस्था में बिल पर क्रेता-विक्रेता का जीएसटी नंबर एवं फर्म का स्थायी पता अनिवार्य होगा। वहीं फर्म बिक्री के लिए क्रेता का जीएसटी नंबर भी दर्ज होगा।
जिले को 50 करोड़ से ज्यादा मिलता है कर
जनपदीय वाणिज्य कर विभाग को कारोबारियों एवं विभागों से औसतन 50 करोड़ से अधिक का कर मिलता है। गत वित्तीय वर्ष में विभाग को 57.72 करोड़ की राशि अर्जित हुई। इनमें सबसे बड़ी राशि आटो मोबाइल एवं टीडीएस से मिलती है।
व्यापारियों की मदद को खोली हेल्प डेस्क
वाणिज्य कर विभाग में जीएसटी हेल्प डेस्क खोली गई है। हेल्प डेस्क के फोन नंबर 05742-232051 और मोबाइल नंबर 7235-002241, 80 पर कॉल पर व्यापारी अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं।