मथुरा में पिता की लाइसेंसी पिस्टल से खेल रहे 12 साल के बालक की गोली लगने से मौत हो गई। हादसे के वक्त घर में केवल मृतक और उसका छोटा भाई था। रिटायर्ड फौजी नौकरी पर था तो मां बाजार गई हुई थी।
जब बाजार से मां लौटकर आई तो खून से लथपथ बच्चा पड़ा देख उसकी चीख निकल गई। सामने मृतक का छोटा भाई रो रहा था। सूचना पर पहुंची हाईवे पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बलदेव के गांव कासिमपुर सैदपुर निवासी नरेंद्र सिंह फौज से रिटायर्ड हैं। रिफाइनरी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे नरेंद्र सिंह परिवार के साथ थाना हाईवे की आनंदवन कालोनी के पीछे प्रगतिकुंज में रह रहे हैं।
मां-बाप गए थे बाहर
शनिवार को पिता नौकरी पर गया था तो मां सामान लेने बाजार चली गई। घर में नरेंद्र सिंह का 12 साल का बेटा दुष्यंत और छोटा बेटा आठ साल का हर्ष घर में अकेला था।
दुष्यंत अलमारी में रखी पिस्टल निकालकर खेलने लगा। दोनों भाई आपस में खेल रहे थे, तभी दुष्यंत के हाथ में लगी पिस्टल से गोली चल गई। सीने में लगी गोली से दुष्यंत खून से लथपथ फर्श पर गिर पड़ा।
हर्ष ने भाई को गिरते देख रोना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में आई मां ने जब दुष्यंत को खून से लथपथ देखा तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। शोर सुनकर पड़ोसी आ गए। आनन-फानन में उसे नयति ले गए।
छठी क्लास में पढ़ता था दुष्यंत
चिकित्सकों ने दुष्यंत को मृत घोषित कर दिया। प्रभारी निरीक्षक उदयवीर सिंह मलिक ने बताया कि लाइसेंसी पिस्टल से चली गोली से बालक की मौत हुई है। गोली कैसे चली यह जांच का विषय है।
रिटायर्ड फौजी नरेंद्र सिंह का बड़ा बेटा दुष्यंत छठवीं क्लास में टाउनशिप स्थित कान्हा माखन स्कूल में पढ़ता था। शनिवार को दोनों भाई स्कूल से पढ़कर लौटे थे। एक बेटे की मौत होने से मां-बाप रो-रोकर बुरा हाल है।
इस घटना से एक बार फिर मां-बाप की लापरवाही उजागर हो रही है। अलमारी में रखी लोडेड पिस्टल से ही दुष्यंत की मौत हुई है। आखिर बच्चों के हाथ लाइसेंसी पिस्टल कैसे लग गई। इसके बाद दोनों बच्चे इससे खेलने भी लगे।