प्रधानमंत्री आवास मिलता तो शायद बच जाती जान
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पटियाली। अग्निकांड के दौरान बालक चैन की नींद सो रहा था। आग से जलती हुई झोपड़ी उसके ऊपर गिरी तो फिर लपटों के बीच उसकी चीख सुनाई नहीं दी। बाहर परिजन बिलख रहे थे। मां सदमे में आ गई और वह बार बार बेहोश हो रही थी। पिता भी पूरी तरह बेसुध हो चुका था।
यह दर्द अग्निकांड में जान गवां चुके नगला महरी के बालक विकास के परिवार का है। जब यह घटना हुई तो विकास के पिता पप्पू पड़ोस में ही जानवरों को चारा डाल रहे थे। मां सावित्री भी घर के बाहर थी। छोटा भाई और छोटी बहन घर के ही बाहर खेल रहे थे। विकास उस समय चैन की नींद सोया हुआ था। अग्निकांड की इस घटना के बाद उसकी आंखें सदा सदा के लिए बंद हो गईं। रोते बिलखते परिजन कह रहे थे कि जब आग लगी और झोपड़ी गिरी तो एक बार तो चीख सुनाई, लेकिन घटना के बाद आग की लपटें इतनी तेज हो गईं कि बेटे की आवाज सुनाई नहीं दे रहीं थीं। इस घटना के लिए लोग कहीं न कहीं प्रशासन को भी जिम्मेदार मान रहे हैं। ग्राम प्रधान सोरन सिंह ने बताया कि किसौल के मझरा टिकुरी और महरी को प्रशासन ने अपने राजस्व अभिलेखों में शामिल नहीं किया है। पूर्व में 405 आवेदन आवासीय योजना के लिए किए गए, लेकिन वह निरस्त हो गए। इन आवेदनों में विकास के पिता पप्पू का भी आवेदन शामिल था।
- पूर्व में आवासीय योजना के तहत आवेदनों की क्या स्थिति है। इसकी जानकारी अभी नहीं है। प्रशासन पूरी कोशिश करेगा कि पीड़ितों को हर सरकारी योजना का लाभ मिल सके। शिवकुमार सिंह, एसडीएम, पटियाली।