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मानकों की अनदेखी कर दौड़ रहे स्कूली वाहन

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मानकों की अनदेखी कर दौड़ रहे स्कूली वाहन - फोटो : अमर उजाला
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एटा। जिले में अधिकांश स्कूली वाहन मानकों की अनदेखी कर दौड़ रहे हैं। वाहनों में गैस किट लगाने के साथ ही ओवर लोड़िंग और प्राथमिक उपचार बॉक्स नहीं लगे। लगातार हादसे होने के बाद भी अधिकारी शिकंजा कसने में नाकाम हैं। इसे लेकर वाहन चालक और स्कूल संचालक नौनिहाल बच्चों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
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स्कूलों में चल रहे वाहनों में मानकों के नाम पर चालक और विद्यालय संचालक ठेंगा दिखाते हुए नजर आ रहे है। जबकि अभिभावकों से वाहन स्वामी और विद्यालय संचालक मोटी फीस वसूलते हैं। जिले में दौड़ रहे अधिकांश वाहनों में मानक पूरे होना तो दूर ज्यादातर वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है। टूटे शीशे और खटारा हालत में वाहनों से बच्चों को लाया ले जाया जा रहा है। इतना ही नहीं क्षमता से दोगुने बच्चों को भी वाहनों में बैठाकर स्कूल और उनके घर तक पहुंचाया जा रहा है। कार्रवाई के नाम पर जिम्मेदार अधिकारी कागजी कोरम पूरा करते हुए शासन का गुमराह कर रहे हैं।
ऑटो और ई-रिक्शा से ले जाए जा रहे बच्चे
एटा। जिले में प्रतिबंधित वाहनों से भी बच्चों को लाया और ले जाया जा रहा है। स्कूली वाहन में ऑटो और ई-रिक्शा मानक में नहीं है। बावजूद इसके जिले में अधिकांश विद्यालयों में इन्हीं वाहनों से बच्चों को लाने और ले जाने का काम किया जा रहा है।
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ये क्षमता का मानक
एटा। एआरटीओ लक्ष्मण प्रसाद ने बताया कि स्कूली बसों में 35 से लेकर 52 सवारियों की क्षमता निर्धारित है। इनमें तीन क्रम की बसें होती है। इसके साथ ही छोटे वाहन वैन आदि में सात सवारियां बैठाने का मानक है।
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समय-समय पर स्कूली वाहनों में मानक आदि की चेकिंग कराई जाती है। पिछले दिनों भी स्कूली वाहनों के खिलाफ जुर्माना, चालन की कार्रवाई हुई थी।
लक्ष्मण प्रसाद, एआरटीओ
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