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ओडीएफ के नाम पर करोड़ों का घोटाला

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ओडीएफ के नाम पर करोड़ों का घोटाला - फोटो : अमर उजाला
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एटा। जिला प्रशासन एटा को दो अक्तूबर को खुले में शौच मुक्त करने का दावा ठोंक रहा है, लेकिन असलियत यह है कि खुले में शौच मुक्त अभियान फेल हो गया है। गांवों में शौचालयों के निर्माण का आलम किसी से छिपा नहीं है। बुधवार को अमर उजाला टीम ने जिले में ओडीएफ अभियान की हकीकत की पड़ताल की। जिसमें फर्जीवाड़े की पोल खुलती नजर आई। पढ़िए रिपोर्ट....
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शौचालयों से वंचित रह गए परिवार
जिले के शीतलपुर के गांव कुसाड़ी में 167 शौचालयों के निर्माण का डाटा स्वच्छ भारत मिशन की वेबसाइट पर फीड किया गया है। जबकि गांव में तमाम पात्र ऐसे हैं, जो प्रधान, सचिव से लेकर दफ्तर तक नाक रगड़ते रहे, लेकिन शौचालय नहीं बन सका।
गांव ओडीएफ, शौचालयों में सीट तक नहीं
गांव कुसाड़ी को रातों रात प्रशासन ने ओडीएफ कर दिया, लेकिन गांव में शौचालयों में सीट तक नहीं है। ऐसे में ओडीएफ के मानकों और नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं।
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73 गांवों में कर दिया ओडीएफ
जिले में अब तक 441 गांव ओडीएफ कर देने का दावा जिला प्रशासन कर रहा है। 15 सितंबर को रात में ही 73 गांवों को ओडीएफ कर दिया गया। जबकि हकीकत में शौचालयों का निर्माण अब तक अधूरा है। कई गांवों में गड्ढे तक नहीं खोदे गए हैं।
8551 शौचालय निर्माण शेष
प्रशासन की फर्जी रिपोर्टिंग को मानें तो जिले में अब 8551 शौचालयों का निर्माण होना बाकी रह गया है। साथ ही 414 गांव ओडीएफ करने हैं। महज 12 दिन में जिले को ओडीएफ करने के लिए फर्जीवाड़ा खूब हो रहा है।
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कहते हैं लोग
हमने शौचालय बनवाने के लिए खूब दरख्वास्त दीं, लेकिन किसी ने नहीं सुनीं।
पुष्पादेवी, कुसाड़ी
शौचालय निर्माण को लेकर कई बार प्रधान और सचिव से कहा। कार्यालय भी गए, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की।
अशोक कुमार, कुसाड़ी
परिवार खुले में शौच जाने को मजबूर है। गांव को खुले में शौच मुक्त कर दिया गया, लेकिन अभी भी अधिकतर लोग खुले में शौच जाते हैं।
मोहर सिंह, कुसाड़ी
इनका कहना है
शौचालयों के निर्माण का काम चल रहा है। लाभार्थियों को पूरा सामान मुहैया करा दिया गया है, लेकिन लोग खुद प्रेरित नहीं हो रहे हैं।
बृजरानी, प्रधान कुसाड़ी
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