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हाशिये पर सेहत, हिम्मत हारतीं सेवाएं

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टीबी अस्पताल चौराहे पर बैरिकेडिंग करते मजदूर
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एटा। जिंदगी की सबसे अहम जरूरत स्वास्थ्य के मामले में जिले का हाल बदहाल है। स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में जिले का हाल बिगड़ता जा रहा है। जिले में मरीजों को दी जाने वाले स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है।
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जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो एक जिला अस्पताल, महिला अस्पताल समेत 38 सीएचसी-पीएचसी हैं। इनमें डाक्टरों के ज्यादातर पद खाली पड़े हुए हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल में दवाओं की आपूर्ति भी अटकी हुई है। जिला अस्पताल समेत तमाम अस्पतालों में साफ-सफाई व्यवस्था भी बदहाल है।


जिला अस्पताल में डाक्टर कम
जिला अस्पताल में सबसे बड़ी समस्या डाक्टरों का अभाव है। यहां 27 पदों के सापेक्ष 15 डाक्टर हैं। इसके साथ ही पिछले कई महीनों से दवाओं की आपूर्ति भी नहीं हो रही है। इससे मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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108 पदों के सापेक्ष महज 40 डाक्टर
जिले में संचालित हो रहीं 38 पीएचसी और सीएच6सी का आलम भी बुरा है। यहां 108 पदों के सापेक्ष महज 40 डाक्टर काम कर रहे हैं। जनवरी में शासन ने नए 29 डाक्टरों की तैनाती की थी, जिनमें अब तक 13 की नियुक्ति हो सकी है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएं हाशिए पर हैं।
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कहते हैं आंकड़े
04 सीएचसी जिले में
34 पीएचसी हैं जिले में
108 पद हैं डाक्टरों के
40 डाक्टरों की है तैनाती
07 डाक्टर चाहिए एक सीएचसी पर
02 डाक्टर तैनात हैं एक सीएचसी पर
27 पद हैं जिला अस्पताल में चिकित्सकों के
15 चिकि त्सकों की है तैनाती
02 डाक्टर अन्य कार्यों से संबद्ध
1500 मरीज औसतन रोज पहुंचते हैं जिला अस्पताल
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