एटा। जिले से गुजर रही 664 किलोमीटर नहरों के बाद भी जिले की जमीन की प्यास नहीं बुझ रही। किसानों का आरोप है कि नहर-बंबों व रजबहों की सफाई न होने से टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा। ऐसे में सैकड़ों गांव पानी से वंचित हो रहे हैं।
एक लाख 85 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि वाले जिले में सिंचाई के साधन अपर्याप्त हैं। ट्यूबवेल दम तोड़ रहे हैं। वहीं नहरें भी जमीन की प्यास नहीं बुझा पा रहीं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले से गुजर रही 198 किलोमीटर नहरें मात्र 27544 हेक्टेयर भूमि को ही पानी दे पा रही हैं।
वहीं जलेसर, मारहरा, निधौली कलां व सकीट क्षेत्र के किसानों का आरोप है कि सफाई के अभाव में पानी टेल तक नहीं पहुंच रहा। माचुआ एवं सकरौली राजवाहों की सफाई कई वर्षों से नहीं हुई है।
नहर-रजबहों की सफाई नहीं होती, जबकि इनके साल में दो बार सफाई के निर्देश हैं। मारहरा, निधौलीकलां एवं शीतलपुर ब्लाक से होकर गुजर रहे माचुआ रजबहा की सफाई बीते दो वर्षों से नहीं हुई है। ऐसे में इसका पानी टेल तक नहीं पहुंच रहा। सैकड़ों गांव सिंचाई से वंचित हो रहे हैं। ऐसा ही हाल सकरौली राजवाह का भी है।
सात सिंचाई खंडों में एटा सिंचाई खंड सबसे बड़ा है। इसकी 198 किलोमीटर नहरों से मारहरा, शीतलपुर, सकीट एवं निधौलीकलां क्षेत्र के 12104 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिल रहा है।
विभाग द्वारा निर्धारित रोस्टर के अनुसार नहरों में पानी छोड़ा जाता है। सिंचाई के दिनों में पर्याप्त पानी रहता है। मारहरा, निधौलीकलां क्षेत्र में नहरों से सर्वाधिक सिंचाई होती है।
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--अजय कुमार भारती, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग