मैनपुरी। तीन तलाक पर कोई कुछ भी कहे, लेकिन इसका दर्द वही मुस्लिम महिला समझती है, जिसके लिए ये तीन शब्द बर्बादी का कारण बन गए। इन तीन शब्दों से महिलाओं ने जहां अपने सौहर खोये, वहीं बच्चों को भी पिता का दुलार नसीब नहीं हुआ। कुछ ऐसी ही कहानी थाना कुर्रा के ओन्हा गांव की मुन्नी की है।
तीन तलाक ने मुन्नी की जिंदगी बर्बाद कर दी। मुन्नी को उम्मीद है कि तीन तलाक विधेयक जल्द कानून बनेगा और आगे किसी मुस्लिम महिला की जिंदगी बर्बाद नहीं होगी।
ओन्हा निवासी मुन्नी (54) की शादी वर्ष 1972 में जिला एटा के पटियाली निवासी शमीम उर्फ सलीम अली के साथ हुई थी। सलीम रेडीमेड कपड़े का काम करते थे। शादी के बाद मुन्नी के एक पुत्र आरिफ, पुत्री यासमीन हुई।
बकौल मुन्नी सलीम आशिक मिजाज था, उसका और भी महिलाओं से संपर्क था। जिसे लेकर आए दिन पति-पत्नी के बीच कलह होती थी। दो बच्चे होने के बाद भी वह दूसरी शादी करना चाहता था, जिसके लिए मुन्नी तैयार नहीं थी। बाद में सलीम
मुन्नी बताती हैं वर्ष 1984 में निकाह फिल्म चल रही थी। रक्षाबंधन के दिन सलीम शराब पीकर घर आए। दूसरी औरतों के घर आने को लेकर विवाद हुआ। सलीम ने तलाक तलाक तलाक कहकर मुन्नी को तलाक दे दिया। इसकी जानकारी मुन्नी ने अपने पिता को दी।
दूसरे ही दिन पिता बली मोहम्मद, भाई नूर मोहम्मद उनको पांच साल के पुत्र आरिफ, तीन माह की पुत्री यासमीन के साथ ओन्हा ले आए। मुन्नी कहती हैं कि पिता पर बोझ बनने की बजाए, बच्चों की परवरिश के लिए बकरी पालन किया। आज बेटा आरिफ दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। उनकी पत्नी सलमा तथा तीन बच्चे दादी के पास ही गांव में रहते हैं।
मुन्नी का कहना है कि तीन तलाक पर अगर कानून पहले होता तो उनको फायदा जरूर होता। तीन तलाक का पुरुष अपने हित में ही फायदा उठाते हैं। अब मुस्लिम महिलाओं के हितों की पूरी तरह रक्षा होगी।
नकाह तो समाप्त नहीं होगा।