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उपकेंद्र-कमिश्नर के पत्र से गांधी को मिली कोर्ट से राहत

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राकेश गांधी - फोटो : अमर उजाला
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एटा। अनुपम काम्पलैक्स में बना विद्युत उपकेंद्र, मंडलायुक्त द्वारा पालिका कार्यालय तोड़ने की अनुमति न देने के साथ ही 2009 से न्यायालय का हस्तक्षेप पूर्व पालिकाध्यक्ष के लिए ढाल बन गए। गुरुवार को उच्च न्यायालय ने ऐसे ही बिंदुआें पर 48.85 लाख रुपये की आरसी के विरुद्ध स्थगनादेश दे दिया।
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पूर्व चेयरमैन राकेश गांधी ने लोकायुक्त की जांच एवं आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि पालिकाध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष के अवैतनिक पद लोकायुक्त की जांच के दायरे में नहीं आते। गांधी ने उच्च न्यायालय को बताया कि काम्पलैक्स परिसर में बना विद्युत उपकेंद्र भी निर्माण में बाधा है।

कोशिशों के बाद भी विद्युत निगम इसे नहीं हटा रहा। परिसर के बीच बना पालिका कार्यालय तोड़ने की अनुमति मंडलायुक्त द्वारा न देने का भी तर्क रखा गया। राकेश गांधी ने न्यायालय में पक्ष रखते हुए बताया कि पूर्व डीएम ने इसका निर्माण आरईएस (ग्राम्य विकास अभिकरण) से कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसे न्यायालय में विचाराधीन एवं विवादित मामला बताते हुए हाथ खड़े कर दिए। 2009 में इसी मामले में तत्कालीन चेयरमैन कंचन अड़ंगा के वित्तीय अधिकार सीज किए गए थे। वहीं ईओ और अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई भी हुई थी।
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बता दें कि तत्कालीन पालिकाध्यक्ष अनुपम अड़ंगा की स्मृति में उनकी पत्नी एवं तत्कालीन पालिकाध्यक्ष कंचन गुप्ता अड़ंगा ने अनुपम कॉम्प्लैक्स का प्रोजेक्ट तैयार किया था। छह करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए दुकानदारों से करीब एक करोड़ रुपये का एडवांस भी लिया गया। ठेकेदार ने काम शुरू किया लेकिन पैसा न मिलने के चलते उसने काम रोक दिया। वहीं ठेकेदार 1.80 करोड़ का बकाया बता रहा तो जिलाधिकारी द्वारा गठित कमेटी ने केवल 30 लाख रुपये की रकम बताई है।


जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद भी विद्युत निगम ने परिसर से उपकेंद्र नहीं हटाया और न ही परिसर के बीच बने पुराने भवन को तोड़ने की अनुमति मंडलायुक्त से मिली। ऐसे में कॉम्प्लैक्स का निर्माण संभव नहीं हो सका। आवंटी दुकानदारों ने भी न्यायालय की शरण ले ली है।
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-राकेश गांधी, पूर्व पालिकाध्यक्ष
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