मैनपुरी। चार शव एक साथ पहुंचते ही अभई गांव परिजनों की चित्कार से गूंज उठा। गांव के बाहर जमा हजारों लोगों की भीड़ भी अपने आंसू नहीं रोक सकी। लोगों की जुबां पर एक ही चर्चा रही।
आखिर सुरेंद्र त्रिवेदी के हंसते खेलते परिवार को किसकी नजर लग गई। घर में अब कोई खाना बनाने वाला तक नहीं बचा है।सुरेंद्र को दिलासा देते समय गांव के लोग खुद अपने आंसू बहा रहे थे।
सुरेंद्र को अपने छोटे बेटे शिव पर नाज था। वह गांव में अक्सर अपने बेटे का युवाओं को उदाहरण देते थे। घर से निकलकर एमबीए की पढ़ाई करने के बाद गोदरेज कंपनी में नोएडा में प्रबंधक की नौकरी करने लगा था।
नोएडा में मकान खरीदते समय भी उसने पिता से ही राय ली थी। शादी करने के लिए वह कुछ और कमाने की बात कहकर टाल देता था। सुरेंद्र के मुंह से एक ही बात निकलती रही कि शिव ने आखिर किसका क्या बिगाड़ा।
उनके परिवार को किसकी नजर लग गई। अंतिम संस्कार के समय सुरेंद्र अपने पुत्र राम को तथा राम अपने वृद्ध पिता को संभालते रहे। राम की तो दुनिया ही उजड़ गई। नोएडा हादसे से उनको गहरा धक्का लगा है।
वह बार-बार अपनी मासूम बेटी को ही याद करते हैं। अंतिम संस्कार के समय भी राम अपनी बेटी को ही याद करके रोते रहे। मां और पत्नी को हादसे में गंवाने वाले राम के घर पर अब कोई खाना बनाने वाला तक नहीं बचा है।