आगरा। 50 किलो आलू के दाम 10 रुपये। मतलब 20 पैसे में एक किलो आलू। यह सुनकर आप दंग रह गए, लेकिन हकीकत है। मंडी में आलू की तीसरी क्वालिटी के किर्री आलू के यही दाम हैं। दूसरे नंबर के आलू गुल्ला 30-40 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो) है।
इस पैसे में तो किसानों का डीजल का खर्च तक नहीं निकल रहा। पहले नंबर की क्वालिटी छट्टा के भले ही 150-300 रुपये प्रति पैकेट मिल रहे हैं, लेकिन लागत फिर भी नहीं निकल रही। प्रति पैकेट खर्च की बात करें तो करीब 900 रुपये पड़ता है।
इससे आहत होकर बुधवार को खंदौली के आबिदगढ़, पुरा गोवर्धन गांवों में कई किसानों ने आलू के सैकड़ों पैकेट खेत में फेंक दिए। शीतगृह में अभी भी 70 लाख पैकेट जमा हैं। निकासी की मियाद नवंबर में खत्म हो गई है।
शीतगृह स्वामियों ने 31 दिसंबर तक किसानों को राहत दी है। इसके बाद मरम्मत कार्य के लिए शीतगृह बंद कर दिए जाएंगे। ऐसे में 30-40 लाख पैकेट फेंकने पड़ जाएंगे। आलू फेंकने वाले किसान देवेंद्र सिंह ने बताया कि आलू को मंडी में लेकर गए, लेकिन वहां कोई खरीदार नहीं मिला।
10 रुपये पैकेट दे रहे थे, इससे भला तो खेतों में फेंकना उचित समझा। आगरा कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष सुदर्शन सिंघल ने बताया कि अभी भी कोल्ड में 60-70 लाख पैकेट जमा है। 30 दिसंबर के बाद कोल्ड स्टोरेज बंद कर दिए जाएंगे। 50 फीसदी आलू फेंकना पड़ सकता है।
समर्थन मूल्य, नहीं बने खरीद केंद्र
प्रदेश सरकार ने आलू का समर्थन मूल्य 487 रुपये घोषित किया, लेकिन इसकी खरीद के लिए कोई केंद्र नहीं बनाए। किसान अशोक कुमार का कहना है कि भले ही शासन ने समर्थन मूल्य लागत से भी कम घोषित किया, लेकिन खरीद कर लेती तो इतना नुकसान नहीं होता।
बाजार में आया नया आलू
बाजार में नया आलू आने से पुराने आलू की और मिट्टी खराब हो गई। पंजाब, हरियाणा से नया आलू बाजार में 10 रुपये किलो मिल रहा है। ऐसे में लोग खाने में अब नए आलू को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ऐसे में अब पुराने आलू के बिक्री की संभावना बेहद कम हो गई है।