बेशक सांसद एवं अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष प्रो. रामशंकर कठेरिया ने आदर्श गांव गोद लेने और छह माह में विकास की गंगा बहाने के दावे किए हों लेकिन तीन साल पहले गोद लिया हुआ गांव पिलखतरा आज भी विकास को तरस रहा है। न पानी, न बिजली और स्वास्थ्य सेवाएं भी बदहाल हैं।
केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद सांसद प्रो. कठेरिया ने पिलखतरा गांव को गोद लिया था। उस दौरान संासद ने जो लंबे चौड़े वादे किए थे। उसमें से विद्युतीकरण और सौर ऊर्जा की लाइट तो लगवा दी गई। मगर सड़क, नाली, खड़ंजा, उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालय जैसी जरूरतों को सांसद पूरा नहीं करा पाए हैं। आज भी गलियों में जगह जगह पानी भरा हुआ है। गांव में जगह जगह गंदगी का आलम है। जिसे स्वच्छ भारत मिशन के तहत भी साफ नहीं करा पाए हैं।
गांव के अक्षय कुमार, भरत भारद्वाज, कैलाश शर्मा का कहना है कि सिंचाई के लिए पिलखतरा, बत्तपुरा एवं पिलखतरा से अब्दुल हईपुर को जोड़ने वाले दोनों पुल जर्जर अवस्था में है। किसी भी समय ध्वस्त हो सकते हैं। कई शिकायतों के बाद भी पुलों को निर्माण नहीं हो पाया है। बुजुर्ग महिला दुलारी देवी ने बताया किसांसद ने पेयजल व्यवस्था के लिए टंकी का निर्माण तो करा दिया लेकिन ठेकेदारों के गुणवत्ता पूर्ण कार्य न कराए जाने से जगह जगह पाइप लाइन लीक कर रही है। शिकायतों के बाद भी कार्यवाही न होने से समस्या बढ़ती जा रही है। संतो देवी ने बताया कि आदर्श गांव में होने के बाद गांव के स्वास्थ्य केन्द्र पर सिर्फ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही नियुक्त है। स्वास्थ्य केन्द्र पर सिर्फ तीन दिन ही चिकित्सक मिलते हैं, बाकी दिनों में ग्रामीणों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
यह कराए हैं कार्य
- गांव का विद्युतीकरण कराया है।
- गांव में सोलर लाइट लगवाई है।
- पानी का ओवर हैड टैंक का निर्माण कराया है।
- संपर्क मार्ग का निर्माण कार्य चल रहा है।
- रोजगार के लिए महिलाओं के समूह का किया गठन
गांव में जरूरत है
- बारात घर
- पंचायत घर
- गांव के अंदर गलियों के निर्माण कार्य की
- शिक्षण संस्थान की स्थापना कराए जाने की
- स्वास्थ्य केन्द्र पर चिकित्सको की तैनाती
- पशु चिकित्सक एवं बीज गोदाम की
एक सफाईकर्मी के सहारे पांच हजार की आबादी
जलेसर। ग्रामीण दिनेश वाल्मीकि ने बताया कि गांव में पांच हजार की आबादी होने के बाद भी ग्राम में मात्र एक सफाई कर्मचारी है। जिसके चलते गांव में सफाई व्यवस्था नाम मात्र की हो पाती है। वहीं गांव में दो प्राथमिक विद्यालय हैं। लेकिन उसमें गंदगी की भरमार है। छात्र छात्राओं को असुविधा का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण ज्ञानेन्द्र सिंह का कहना है कि विद्यालय में शिक्षक तो आते हैं लेकिन खाना पूर्ति करके चले जाते हैं।
स्कूल के लिए ग्राम प्रधान हमें जमीन दें तो हम प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज देंगे। रही बात खंड़ज ठीक कराए जाने की तो अभी 80 लाख रुपये स्वीकृत कराए हैं। जल्द ही खंड़जों का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। गांव में जाने का रास्ता तक नहीं था। जिसमें निर्माण करा दिया है। साथ ही ग्रामीणों से अपील है कि वह पाइप लाइन डालने वाले ठेकेदार की मदद करें, जिससे लीकेज ठीक हो सके।
- प्रो. रामशंकर कठेरिया, सांसद