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प्रशासन ने पसीना बहाया वोटरों ने वोट

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प्रशासन ने पसीना बहाया वोटरों ने वोट - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। एटा संसदीय क्षेत्र के मतदान प्रतिशत में वर्ष 2014 के चुनावों के मुकाबले करीब 4 फीसदी इजाफा हुआ है। मत प्रतिशत बढ़ने के पीछे सबसे अहम कारण प्रशासन के मतदाता जागरूकता कार्यक्रमों को माना जा रहा है। साथ ही मतदान के दिन बूथों पर की गई व्यवस्था और आकर्षक सजावट की भी अहम भूमिका रही है।
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वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 58.79 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि इस बार 62.65 फीसदी वोट पड़े। यह अंतर करीब 4 प्रतिशत का है। मत प्रतिशत संसदीय क्षेत्र की सभी विधानसभाओं में बढ़ा। सर्वाधिक मतदान 64.39 प्रतिशत मारहरा विधानसभा क्षेत्र में हुआ, जो पिछले चुनाव से पांच फीसदी अधिक है। कासगंज विधानसभा क्षेत्र में 64.12 फीसदी वोट डाले गए, जो चार प्रतिशत अधिक है। तीसरे स्थान पर अमांपुर विधानसभा क्षेत्र रहा, यहां 62.48 प्रतिशत वोट पड़े, जो करीब 2 प्रतिशत अधिक है। एटा विधानसभा क्षेत्र में 61.73 प्रतिशत मतदान पिछले चुनाव से 5 प्रतिशत अधिक है। सबसे कम मतदान पटियाली विधानसभा क्षेत्र में 60.54 प्रतिशत हुआ, लेकिन यह पिछले चुनाव के मुकाबले 3 प्रतिशत से अधिक है।
मतदान बढ़ने प्रमुख कारण
- करीब एक महीने तक मतदाता जागरूकता के कार्यक्रमों का आयोजन।
- सखी बूथों पर आकर्षक साज सज्जा, महिला वोटरों को मिली वरीयता।
- दिव्यांग और वृद्ध मतदाताओं को दी गईं सुविधाएं।
- मतदान की पर्चियां घर-घर पहुंचाई गईं।
- मतदाताओं के आने-जाने के लिए वाहनों पर रोक नहीं।
- मतदान दिवस पर उत्सव जैसा माहौल मतदाताओं को लुभाने में कामयाब रहा।
- भाजपा और गठबंधन प्रत्याशी में सीधे मुकाबले से कार्यकर्ताओं में जोश।
20 वर्ष के बाद बढ़ा मत प्रतिशत
एटा संसदीय क्षेत्र में 1952 से अब पूर्व के दो लोकसभा चुनावों में दो बार अच्छे मत पड़े। 1977 में सर्वाधिक 66.96 प्रतिशत मतदान का रिकॉर्ड रहा, जो अभी तक नहीं टूटा। 1998 के लोकसभा चुनावों में 63.87 प्रतिशत मतदान रहा। इन बीस वर्षों में कभी भी मतदान फर्स्ट डिवीजन के आंकड़े को पार नहीं कर सहा, लेकिन इस बार मतदाताओं के उत्साह से मतदान 62.65 प्रतिशत के आंकड़े पर पहुंच गया।
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