मथुरा। चौबीस साल से भारत में रह रहे एक कनाडा निवासी को वृंदावन से गिरफ्तार कर लिया गया है। फर्जी नागरिकता प्रमाणपत्र के आधार पर वह वृंदावन में ही पिछले आठ साल से डेरा जमाए था। हालांकि इस बीच उसकी कोई संदिग्ध गतिविधि सामने नहीं आई है। उसके पास से फर्जी नागरिकता प्रमाणपत्र जरूर बरामद हुआ जो ऋषिकेश से एक वकील के माध्यम से बनवाया गया था। कई खुफिया एजेंसियों ने उससे पूछताछ की है।
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक कनाडा निवासी रयान एडवर्ड ग्लाड स्टोन (55) पुत्र स्व. थॉमस अरथर वर्ष 1994 में टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। वह वाराणसी में भी रहा। यहां उसने पढ़ाई की। इस दौरान टूरिस्ट वीजा की अवधि बढ़वा ली गई थी। पहले वह टूरिस्ट वीजा पर रहा फिर स्टूडेंट वीजा बनवा लिया था। वाराणसी में करीब दो से तीन साल रहने के बाद वह हरिद्वार और ऋषिकेश में घूमने चला गया।
एसपी सिटी श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि 1997 में ऋषिकेश पहुंचा और उत्तराखंड में घूमता रहा। बाद में 2004 में ऋषिकेश में एक वकील के माध्यम से उसने फर्जी नागरिकता प्रमाण पत्र बनवा लिया था। बताया जाता है कि इसके लिए उसने 30 लाख खर्च किए। काफी दिनों तक दिल्ली और गुरुग्राम में रहते हुए साल 2010 में वृंदावन के इस्कॉन मंदिर पहुंच गया। यहां पर फर्जी नागरिकता प्रमाण पत्र पर ब्रह्मचार्य आश्रम में रह रहा था। इस मामले में आईबी और आर्मी इंटेलीजेंस ने कनाडा से भी पूछताछ की लेकिन फिलहाल कहीं भी कुछ संदिग्ध गतिविधियों का मामला सामने नहीं आया। एलआईयू इंस्पेक्टर केपी कौशिक ने बताया कि पकड़े गए विदेशी नागरिक को जालसाजी और 14 फॉरनर एक्ट के तहत जेल भेजा गया है।
धार्मिक स्थलों पर आता जाता रहा
मथुरा। टूरिस्ट वीजा पर आया विदेशी नागरिक भारत में 24 साल तक रहा। वह बनारस, हरिद्वार, ऋषिकेश, गुरुग्राम और वृंदावन के अलावा देश के कोने-कोने में गया, पर उसकी कहीं भी चेकिंग न होना सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। साल 2010 वृंदावन में रहने वाले विदेशी नागरिक का खुलासा साल 2018 में मथुरा पुलिस और एलआईयू ही कर सका। 2004 में डीएलएफ फेस-2 एम 14/1 गुरुग्राम हरियाणा के पते पर फर्जी नागरिकता प्रमाणपत्र भी हासिल कर लिया। इसकी एवज में 30 लाख रुपये भी व्यय किए।
ऋषिकेश के वकील की जुटाई जा रही जानकारी
मथुरा। कोतवाली प्रभारी प्रवीन सिंह मान ने बताया कि ऋषिकेश में वकील की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके अलावा देश में यह कहां-कहां गया, यह भी पता किया जा रहा है। पकड़े गए विदेशी की संदिग्ध संलिप्तता कहीं नहीं मिली। इसके बावजूद उसकी जांच की जा रही है। इस्कॉन मंदिर प्रबंधन से भी पूछताछ की जाएगी।