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ई ऑफिस की तैयारी और जिला पड़ा है खाली

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ई ऑफिस की तैयारी और जिला पड़ा है खाली - फोटो : अमर उजाला
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एटा। जिले केे सरकारी विभागों को 15 अगस्त से ई-आफिस व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी शुरू हो चुकी है लेकिन जिले में व्यवस्था को चलाने वाले अधिकारी नहीं हैं। आलम यह है कि जिले में तमाम जिला स्तरीय अधिकारियों के पद खाली पड़े हैं। साथ ही विभागों में वरिष्ठ अधिकारी नहीं होने से सारे काम लंबित हैं। ऐसे में ई-आफिस का प्रशिक्षण और संचालन बेमानी साबित हो रहा है। पढ़िए रिपोर्ट....
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बेसिक शिक्षा में नहीं अधिकारी
जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में बेसिक शिक्षा अधिकारी की तैनाती नहीं है। बीएसए एसके तिवारी का बहराइच तबादला होने के बाद रमाकांत वर्मा को एटा भेजा गया लेकिन पिछले दिनों शासन ने उनका तबादला निरस्त कर दिया। अब जिले में बीएसए का प्रभार डायट प्राचार्य मनोज गिरि संभाल रहे हैं। इसके अलावा जिले के आठ ब्लॉकों में महज चार एबीएसए की तैनाती है। साथ ही लेखाधिकारी का पद भी खाली पड़ा है।
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डेढ़ साल से नहीं हैं डीपीओ
जिले में जिला कार्यक्रम अधिकारी का पद पिछले डेढ़ साल से खाली है। उनका प्रभार सीडीपीओ सत्यप्रकाश संभाल रहे हैं। वे एक परियोजना के साथ अतिरिक्त रूप से जिले को भी देख रहे हैं। वहीं विभाग की नौ परियोजनाओं में महज चार सीडीपीओ हैं।
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डीपीआरओ की भी कुर्सी खाली
जिला पंचायत राज विभाग मेें जिला पंचायत राज अधिकारी का पद खाली है। इसे अब तक प्रभारी के तौर पर धनंजय जायसवाल संभाल रहे हैं। पिछले दिनों शासन ने नए डीपीआरओ का तबादला एटा किया गया है, लेकिन हाइकोर्ट ने तबादले पर रोक लगा दी है। साथ ही विभाग में 576 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष महज 90 ग्राम पंचायत अधिकारियों की तैनाती है।
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प्रभारियों के हवाले ब्लॉक के काम
जिले के खंड विकास कार्यालय भी प्रभारियों के हवाले हैं। जिले के आठ ब्लॉकों मेें महज दो बीडीओ हैं। इसमें से एक बीडीओ का तबादला हो चुका है, लेकिन उनको अब तक रिलीव नहीं किया गया है।
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जन कल्याण के विभाग भी खाली
जनता के कल्याण की योजनाएं चलाने वाले विभागों में भी जिला स्तरीय अधिकारी नहीं हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण, दिव्यांग सशक्तिकरण, प्रोबेशन, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग खाली पड़ा है। इसमें अधिकांश विभागों का प्रभार समाज कल्याण अधिकारी शिव कुमार पर है। वहीं सेवायोजन विभाग को पूरे डेढ़ साल से अधिकारी नहीं मिले हैं। ग्रामीण विकास विभाग में भी अधिशासी अभियंता की तैनाती नहीं है।
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नौ नगर निकायों पर तीन ईओ
जिले में नौ नगर निकायों का हाल भी बुरा है। व्यवस्थाओं के संचालन के लिए महज तीन अधिशासी अधिकारियों की तैनाती है। वहीं छह अधिकारियों के पद खाली हैं। ऐसे में नगर निकायों में स्वच्छ भारत मिशन को बट्टा लग रहा है।
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अस्पताल को सीएमएस का इंतजार
जिला अस्पताल को भी सीएमएस का इंतजार है। सीएमएस डा. एसके मजूमदार का तबादला होने के बाद प्रभार महिला अस्पताल के सीएमएस डा. प्रदीप कुमार पर है। वे ब्लड बैंक में बैठकर दोनों अस्पतालों पर नजर बनाए हैं।
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