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जलकल घोटाले की जांच ठंडे बस्ते में

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आगरा। जलकल विभाग में निर्माण और उपकरणों की खरीद में हुए घोटाले की जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। न तो कमिश्नर के आदेशों का पालन हुआ है और ना ही नगर आयुक्त के आदेशों पर कोई कार्यवाही की गई है। हैरत की बात यह है कि नगर निगम सदन में दस्तावेज उपलब्ध न कराने की दशा में एफआईआर कराने का दावा करने वाले नगर आयुक्त ने भी कोई कार्रवाई नहीं की है।
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गौरतलब है कि जलकल विभाग की पूर्व जीएम मंजू रानी गुप्ता के कार्यकाल में 13 वे वित्त आयोग की धनराशि से सीवर, पानी की पाइप लाइन बिछाने और उपकरणों की खरीद पर करीब 8.5 करोड़ रुपये खर्च किए थे। आरोप है कि उपकरणों की खरीद में मनमाने तरीके से भुगतान किया गया था।

सीवर के मैनहोल के ढक्कन नगर निगम ने प्रति ढक्कन 1900 रुपये का भुगतान किया था, ऐसे ही ढक्कन जल निगम ने 3600 रुपये प्रति नग के हिसाब से खरीदे थे। सीवर और पानी की लाइन के मामले में कार्य पूर्ण हुए बिना भी ठेकेदारों का भुगतान कर दिया गया। पार्षद हेमंत प्रजापति की शिकायत पर कमिश्नर के. राममोहन राव ने मामले की जांच अपर आयुक्त आरपी सिंह को सौंपी थी।
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अपर नगर आयुक्त ने जलकल विभाग को तीन दिन के अंदर दस्तावेज उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे लेकिन न तो उन्हें दस्तावेज उपलब्ध कराए गए और ना ही अपर आयुक्त ने मौके पर जांच करने का जहमत उठाई।

नगर आयुक्त ने भी नहीं कराई एफआईआर
जब मामला नगर निगम सदन के पिछले अधिवेशन में उठा तो नगर आयुक्त ने सभी पार्षदों के समक्ष जीएम जलकल चंदन सिंह से सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए दस दिन के अंदर खरीद और निर्माण कार्य से संबंधित समस्त पत्रावली सदन को उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि दस दिन के अंदर पत्रावली नहीं मिली तो नगर आयुक्त स्वयं ही जलकल विभाग के अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएंगे लेकिन नगर आयुक्त ने भी कुछ नहीं किया।

अपर आयुक्त आरपी सिंह की पिछले 20 दिन से तबियत खराब है। वह छुट्टी पर चल रहे हैं, इसकी वजह से जांच की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। वे ड्यूटी ज्वाइन करेंगे तभी जांच की कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
के. राममोहन राव, मंडलायुक्त

ये बात सही है कि दस्तावेज नहीं मिले हैं, इस मामले में कार्रवाई निश्चित तौर पर होगी। एक दो दिन में जलकल विभाग के नए महाप्रबंधक ज्वाइन कर रहे हैं। उनके आने के बाद एक सप्ताह तक समय दिया जाएगा। यदि जलकल विभाग की ओर सकारात्मक कार्यवाही नहीं की गई तो कार्रवाई की जाएगी।
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अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त
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