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विवि की 1.80 लाख डिग्रियां गायब

Mon, 11 Jul 2016 01:48 AM IST
अमर उजाला आगरा
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एजेंसी बोली प्रिंट कर विवि को सौंपी, कुलसचिव ने नकारा
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आवेदकों को नहीं मिलीं डिग्रियां, लगातार काट रहे हैं चक्कर

धर्मेंद्र त्यागी
डा. बीआरए विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों के भविष्य पर बन आई है। फर्जीवाड़े के लिए बदनाम विश्वविद्यालय का एक और ‘कारनामा’ सामने आया है। 2013 और 2014 सत्र की 1.80 लाख डिग्रियां गायब हो गई हैं। इन्हें तैयार करने वाली एजेंसी ने प्रिंट कर विश्वविद्यालय को सौंपने की बात कही है, वहीं कुलसचिव ने इसे नकार दिया है।  
2014 सत्र का रिजल्ट मार्कशीट-डिग्री बनाने का जिम्मा दिल्ली की शुभाटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सौंपा था। इसका टेंडर करीब 2.25 करोड़ रुपये का था। इसमें री-एग्जाम समेत 2014 सत्र की करीब 6.80 लाख मार्कशीट और करीब 1.60 लाख डिग्रियां बनानी थीं। कार्य शुरू होने के बीच एजेंसी को 2013 सत्र की करीब 20 हजार डिग्री और बनाने को दे दी गईं, इसके लिए अलग भुगतान किया जाना था। सत्र गुजरे दो साल हो गए, लेकिन छात्रों के हाथ में डिग्री नहीं पहुंचीं। एजेंसी ने कार्य करना पूरी तरह से बंद कर दिया है।  
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2014 के चार्ट का भी नहीं अता-पता 
डिग्रियां ही नहीं 2014 के चार्टों का भी अता-पता नहीं। एजेंसी कहती है कि उन्होंने सभी विषयों के चार्ट विश्वविद्यालय भेज दिए हैं, रिसीविंग भी प्राप्त की है। वहीं, कुलसचिव का कहना है कि कुछ विषयों के ही चार्ट मिले हैं, बाकी को एजेंसी दबाए हुए है।

अब विश्वविद्यालय करेगा छपाई
एजेंसी द्वारा कार्य बंद कर दिए जाने के बाद विश्वविद्यालय खुद छपाई करेगा। इसके लिए दुष्यंत दीक्षित को प्रभारी बनाया है। 2014 से जुड़ी मार्कशीट और डिग्री के लिए कुलसचिव कार्यालय के पास हेल्प डेस्क बना दी गई है। यहां आई शिकायतों पर चार्ट की कार्बन कापी से मिलान कर मार्कशीट-डिग्री तैयार करेंगी।  

विश्वविद्यालय में फर्जीवाड़ा दर फर्जीवाड़ा
हाल ही में विश्वविद्यालय के दीनदयाल ग्राम्य विकास संस्थान का शिलान्यास करने आए राज्यपाल राम नाईक ने विश्वविद्यालय के हर भ्रष्टाचार की जांच कराने की बात कही थी। इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट की फर्जी मार्कशीट, रिजल्ट में आनलाइन फर्जीवाड़ा, एमबीबीएस के चार्ट गायब और डिग्रियां भी। मामले की जांच हो तो बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है। 

- 6.80 मार्कशीट और 1.80 लाख डिग्रियां प्रिंट कर विश्वविद्यालय को सौंप दी हैं। अभी तक करीब 70 लाख रुपये ही मिले हैं, बकाया करीब पौने दो करोड़ रुपये है। काम बंद कर दिया है। - सुशांत गिरि, एजेंसी संचालक 
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- एजेंसी झूठ बोल रही है, चार्ट नहीं दिए, मार्कशीट प्रिंट होनी बाकी हैं, कुछ डिग्रियां मिली हैं, हजारों डिग्री बाकी हैं। कार्य पूरा होने पर ही भुगतान होगा। 
- केएन सिंह, कुलसचिव 
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