इंडियन मुजाहिद्दिन (आईएम) के आतंकी अफजल उस्मानी के मुंबई से फरार होने के बाद उसके अल्पसंख्यक बाहुल्य गांव ढिलाईफिरोजपुर और आसपास के कई गांवों में ‘अफजल’ या ‘उस्मानी’ नाम के लोगों की जान सांसत में है।
वजह यह कि खुफिया एजेंसियां और एटीएस (एंटी टेरिरिस्ट स्क्वाड) ‘अफजल’ अथवा ‘उस्मानी’ नाम वाले कई लोगों को गांव से उठाकर पूछताछ कर चुकी है। ढिलाईफिरोजपुर और आसपास के कुछ गांवों में ‘अफजल’ या ‘उस्मानी’ नाम के करीब 20 लोग हैं।
ये लोग दहशत में हैं कि खुफिया एजेंसियां कभी भी इन्हें पूछताछ के लिए उठा सकती हैं।
ढिलाईफिरोजपुर के आसपास के गांवों का हाल यह है कि क्षेत्र के ‘अफजल’ या ‘उस्मानी’ नाम के लोग मोबाइल पर अपना नाम बताकर किसी से बात करने से भी घबराते हैं।
‘अफजल’ के बारे में जानकारी जुटाने में लगे खुफिया संगठनों तथा एटीएस की हर कार्रवाई गोपनीय होती है। ये एजेंसियां क्या कर रही हैं, गांव में कब धमक पड़े तथा किसे उठा लें, किसी को पता नहीं होता। यह सब अचानक ही होता है। दो दिन पूर्व एटीएस ने एक पूर्व प्रधान को उठाया था।
इस प्रधान के घर में शायद किसी का नाम ‘अफजल’ है या किसी सदस्य के तार ‘अफजल’ से जुड़े होने की एटीएस को जानकारी मिली थी। इसी तरह एक अध्यापक को भी एटीएस ने उठाया था। इस अध्यापक के बड़े भाई के बेटे का नाम ‘अफजल’ है।
दोनों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। अफजल का सुराग लगाने में एटीएस के साथ स्थानीय पुलिस भी लगी है। ढिलाईफिरोजपुर के लोग बताते हैं कि अफजल का नाम सुर्खियों में आने से गांव पर दाग लगा है।