कुंडा के बलीपुर में क्षेत्राधिकारी (सीओ) जियाउल हक की हत्या का मुख्य आरोपी नाबालिग निकला।
सीबीआई ने नाबालिक आरोपी समेत कुल चार आरोपियों को अदालत में पेश कर उन्हें 15 दिनों के लिए रिमांड पर दिए जाने की मांग की थी।
अदालत ने नाबालिग आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड व अन्य को 28 अप्रैल तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
सीबीआई ने शनिवार को इन्हें गिरफ्तार किया था और रविवार को इन्हें सीबीआई के रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
सीबीआई इन आरोपियों को कड़ी सुरक्षा में दोपहर करीब दो बजे लखनऊ लेकर पहुंची। जब तक रिमांड मजिस्ट्रेट अदालत नहीं पहुंचे सीबीआई ने आरोपियों को पुलिस वाहन में ही बैठाए रखा।
इनके साथ सशस्त्र पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। सीबीआई अफसरों ने इस बात का खास ख्याल रखा कि आरोपियों से कोई बात न कर सके।
जब उन्हें अदालत में पेश किया गया तो रिमांड मजिस्ट्रेट ने उन्हें 28 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में लेकर मामले की सुनवाई की।
आरोपियों के अधिवक्ता बसंतलाल ने सीबीआई पर थर्ड डिग्री इस्तेमाल कर जबरन अपराध कबूल कराने का आरोप लगाते हुए दलील दी कि सीबीआई ने गलत तरीके का इस्तेमाल किया है और जिसकी हत्या हुई उसके ही नाबालिग बेटे को सीओ के कत्ल का प्रमुख आरोपी बना दिया गया।
रिमांड मजिस्ट्रेट नियाज अहमद अंसारी ने आरोपियों को 28 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में लेते हुए प्रधान के बेटे को अगले आदेशों तक किशोर न्याय बोर्ड भेजने के साथ ही फूलचंद्र, पवन व मंजीत को जेल भेज दिया।
फूलचंद्र की अर्जी पर कोर्ट ने जेल भेजने से पहले मेडिकल कराने का आदेश दिया है।
कोर्ट में प्रधान के बेटे की ओर से उसके अधिवक्ता ने अर्जी देकर बताया गया था कि आरोपी की उम्र हाईस्कूल की मार्कशीट के अनुसार लगभग 17 वर्ष है लिहाजा उसे जेल न भेजा जाए तथा उसे रिमांड पर न दिया जाए।
कोर्ट में उसकी मार्कशीट पेश की गई, जिस पर कोर्ट ने सीबीआई के विवेचक डिप्टी एसपी सुरेंद्र सिंह गुर्म से आयु संबंधी किसी प्रमाण के बारे में पूछा, लेकिन वे आरोपी के बालिग होने संबंधी कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाए।
इस पर अदालत ने सीबीआई की रिमांड की अर्जी को नामंजूर करते हुए प्रधान नन्हे के बेटे को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर अगले आदेश तक किशोर न्याय बोर्ड में रखने का आदेश दिया।