लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज में संचालित पाठ्यक्रमों के दुर्दिन दूर होने का नाम नहीं ले रहे हैं। इस बार काउंसलिंग के पहले ही मैनेजमेंट के कुछ कोर्सेस के डूबने की भूमिका तय हो गई है। सोमवार को मैनेजमेंट के पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आवेदन का आखिरी मौका है लेकिन अभी तक जितनी सीटें हैं, उतने भी आवेदन नहीं आ सके हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में एमबीए के रेगुलर और सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। इसके अलावा सात और पाठ्यक्रम आईएमएस में संचालित होते हैं। इन पाठ्यक्रमों में कुल 560 सीटें हैं। इनके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 14 जनवरी से शुरू हुई थी और 15 मार्च को समाप्त होनी थी। हालांकि, इस तारीख तक आवेदन का आंकड़ा 300 भी पार नहीं कर सका था। डूबते पाठ्यक्रमों का अस्तित्व बचाने के लिए लविवि प्रशासन ने आवेदन विंडो एक महीने के लिए और खोल दिया। इस कवायद से भी पाठ्यक्रमों की किस्मत बदलती नजर नहीं आ रही है। सोमवार को आवेदन प्रक्रिया समाप्त हो रही है। सूत्रों का कहना है कि अब तक लगभग 425 आवेदन ही इन पाठ्यक्रमों के लिए आए हैं। हालांकि, लविवि के जिम्मेदार आंकड़े सार्वजनिक करने के लिए आखिरी तारीख के इंतजार की बात कर रहे हैं।
साल दर साल हाल बदहाल
अब इसे मंदी का असर कहें या छात्रों को दिखाए जाने वाले सब्जबाग को हकीकत में बदलने में आईएमएस के जिम्मेदारों की असफलता, साल दर साल इसके पाठ्यक्रमों की हालत खस्ता होती जा रही है। वर्ष 2011-12 की आवेदन प्रक्रिया के दौरान आईएमएस में नौ और एमबीए में दो कोर्स प्रवेश प्रक्रिया में शामिल थे। खास बात यह है कि 660 सीटों के लिए आवेदनों का आंकड़ा दोगुने से ज्यादा था। इसके बाद जिम्मेदार पाठ्यक्रम और प्लेसमेंट की हालत सुधारने के बजाय छात्रों से वसूली पर केंद्रित हो गए। पाठ्यक्रमों के शुल्क दोगुने तक बढ़ाए गए। असर यह रहा कि दो पाठ्यक्रम स्थगित करने पड़े और तीन में आधी सीटें खाली रह गईं। ये सिलसिला शुरू हुआ तो इसे रोकने की रणनीति भी जिम्मेदार नहीं बना पाए। पिछले सत्र में आवेदन के आंकड़े ही 40 प्रतिशत घट गए। दो बार आवेदन प्रक्रिया और काउंसलिंग कराए जाने से लेकर कैट में एक पर्सेंटाइल तक पर दाखिला लेने के बाद भी जिम्मेदार अपने आधे कोर्स नहीं बचा सके। 660 सीटों पर दाखिलों की संख्या महज 307 रही। 11 कोर्सेज में केवल तीन की सीटें भर पाईं। तीन की सीटें खाली रहीं और छात्रों के अभाव में पांच कोर्स स्थगित करने पड़े। इस बार आवेदन प्रक्रिया से ही एमबीए इन एग्री बिजनेस मैनेजमेंट एवं एमबीए इन रूरल डवलपमेंट को बाहर कर दिया गया क्योंकि यह कोर्स लगातार तीन साल से स्थगित हो रहे थे। इसके बावजूद इस साल के आवेदन के आंकड़े भी बेहतर भविष्य की ओर इशारा नहीं कर रहे हैं।
एमबीए में आवेदन की स्थिति
वर्ष आवेदन
2011 1692
2012 914
2013 425
(नोट : 2013 के आंकड़े रविवार तक के ही हैं जबकि आवेदन की आखिरी तारीख सोमवार तय है।)