आरुषि-हेमराज मर्डर केस में मंगलवार को भी लंदन से आए डीएनए एक्सपर्ट डॉ. आंद्रे सेमीखोस्की ने अपने बयान दर्ज कराए।
सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल की कोर्ट में गवाह के बयान पूरे होने के बाद अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक आरके सैनी और बीके सिंह ने जिरह शुरू की। करीब 27 प्रश्न अभियोजन ने गवाह से पूछे।
घटनास्थल से सीज किए गए खूनी पंजा लगे दीवार के टुकडे़, खुखरी और शराब की बोतलों को भी कोर्ट में पेश किया गया।
डीएनए एक्सपर्ट ने इन चीजों का निरीक्षण करने के बाद कहा कि दीवार के टुकडे़ और खुखरी से डीएनए जनरेट किया जा सकता है। कोर्ट ने बाकी जिरह के लिए अब 19 सितंबर की तारीख तय की है।
दूसरे दिन के अपने बयान में डॉ. आंद्रे ने कहा कि डॉ. बीके महापात्रा ने जो डीएनए रिपोर्ट कोर्ट में पेश की है, उससे यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि वह सही है।
उनका कहना था कि डॉ. महापात्रा ने अपने बयान में कहा है कि उसे डीएनए से संबंधित ‘हार्डी बिनबर्ग लॉ के सिद्धांत’ की जानकारी नहीं है। यह कथन डॉ. महापात्रा की योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
गवाह का कहना था कि जो भी डीएनए एक्सपर्ट इस सिद्धांत को नहीं जानता, वह सही प्रकार से डीएनए टेस्ट नहीं कर सकता।
अभियोजन के पहले सवाल का जवाब देते हुए डॉ. आंद्रे ने कहा कि वह जानते हैं कि अगर कोर्ट में झूठा बयान देंगे, तो उनके खिलाफ भारतीय कानून के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है।
अभियोजन के एक सवाल (कि वह पैसा लेकर गवाही देने आया है) के जवाब में डॉ. आंद्रे का कहना था कि हालांकि वे बिजनेस टाइप का वीजा लेकर भारत आए हैं, मगर उन्होंने आरुषि-हेमराज मर्डर केस मामले में कोई फीस नहीं ली है।
चूंकि इस केस की डीएनए रिपोर्ट का गलत तरीके से विश्लेषण किया गया, इसलिए वे अंतर्रात्मा के लिए गवाही देने भारत आए हैं।
दूसरी ओर डॉ. आंद्रे के बयान के बाद डिफेंस के अधिवक्ता मनोज शिशौदिया का कहना है कि डिफेंस कोर्ट से इस बात की मांग कर सकता है कि दीवार पर लगे खूनी पंजे और खुखरी से डीएनए जनरेट किए जाने की अनुमति दी जाए।
हालांकि, विचार-विमर्श के बाद ही इस बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा।