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स्कूली वैन ने मासूम को रौंदा, मौत

Wed, 31 Jul 2013 05:33 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। पीजीआई क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक स्कूली वाहन ने घर के बाहर खेल रहे मासूम को रौंद दिया। हादसे में मासूम गंभीर रूप से घायल हो गया। घरवाले उसे इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले गए। जहां पर डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद आरोपी चालक वैन छोड़कर भाग न निकला। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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पुलिस के मुताबिक, पीजीआई क्षेत्र की वृंदावन कॉलोनी सेक्टर-7 निवासी बृजेश कुमार शिवनंदन इंटर कॉलेज में शिक्षक हैं। रोजाना की तरह सुबह उनकी बेटी को लेने के लिए स्कूली वैन घर आई थी। उनकी पत्नी गायत्री बेटी को वैन में बैठाने के लिए बाहर आई थी। इस बीच पीछे-पीछे उनका डेढ़ वर्षीय पुत्र संस्कार भी आ गया। वह बेटी को स्कूली वैन में बैठाने लगी वहीं मासूम वैन के आगे जाकर खेलने लगा। इसी दौरान चालक ने बिना देखे वाहन आगे बढ़ा दिया। मासूम संस्कार वैन के नीचे कुचलकर गंभीर रूप से घायल हो गया। गायत्री के शोर मचाने पर वैन चालक ने गाड़ी रोक दी। घरवाले मासूम को लेकर नजदीकी अस्पताल गए। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद संस्कार को मृत घोषित कर दिया। इस बीच वैन चालक लोगों को चकमा देकर भाग निकला। घटना के बाद कॉलोनी के लोगों ने आरोपी चालक की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। घटना की सूचना पाकर पुलिस भ्ीा मौके पर पहुंची और आरोपी चाल को जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया। इसके बाद लोग शांत हुए। पीड़ित बृजेश की तहरीर पर पुलिस ने चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। एसओ अमित कुमार तोमर ने बताया कि चालक की गिरफ्तारी के लिए उसके घर पर दबिश दी गई थी, लेकिन उसका पता नहीं चला। उसकी तलाश में छापेमारी की जा रही है।
घर का चिराग बुझ गया
हादसे में बेटे की मौत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। गायत्री देवी गश खाकर गिर गई। कॉलोनी के लोग उन्हें उठाकर कमरे में ले गए। थोड़ी देर बाद होश आने पर वह बार-बार बेटे की फोटो देखकर बिलख रही थीं। घरवालों के मुताबिक, कई सालों बाद गायत्री को एक पुत्र हुआ था। हादसे में मासूम की मौत के बाद घर का इकलौता चिराग बुझ गया। पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था।
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काल बनकर आई वैन
बृजेश की पुत्री संस्कृति नीलमथा स्थित एक निजी स्कूल की छात्रा थी। छात्रा को स्कूल लेने के लिए रोजाना स्कूली वैन आती थी। लेकिन मंगलवार सुबह वही स्कूली वैन संस्कार के लिए काल बन गई। गायत्री बेटे संस्कार को दूध पिलाकर बेड पर लिटाकर आई थी, लेकिन वह बहन को जाता देख पीछे-पीछे भाग आया। गायत्री बेटी को वैन में बैठा ही रही थी कि वह वैन के आगे जा पहुंचा।
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