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रेलवे की थाली में भ्रष्टाचार का तड़का

Mon, 29 Jul 2013 05:33 AM IST
Lucknow
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केस 1 : 26 मई को नई दिल्ली सियालदह राजधानी एक्सप्रेस की बोगी-बी 11 में खराब खाना खाकर 70 यात्री बीमार हो गए। सांसद समेत 35 यात्रियों को मुगलसराय स्टेशन पर उतारकर अस्पताल भेजा गया।
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केस 2 : तीन दिन पहले कानपुर के पास राजधानी एक्सप्रेस के कई यात्री ट्रेन में खाना खाकर बीमार हो गए। मामले की शिकायत रेलवे बोर्ड के अधिकारियों तक पहुंची लेकिन कार्रवाई ही नहीं हुई।

ताजा मामला शनिवार को लखनऊ से नई दिल्ली जा रही ट्रेन 12003 शताब्दी एक्सप्रेस में सामने आया। यहां भी कानपुर से चढ़ाए गये खाने का खाकर कई यात्रियों की तबियत बिगड़ गई। साधारण मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों के आम यात्रियों की सुध कौन ले, जब देश की वीआईपी ट्रेनें राजधानी एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस के यात्रियों की थाली में ही भ्रष्टाचार का तड़का लगाया जा रहा है। अधिक मुनाफाखोरी के लिए देश की सबसे बड़ी कैटरिंग कम्पनी आरके एसोसिएट रेल यात्रियों को घटिया खाना परोस रही है। ऊपर दी गई जिन चार ट्रेनों में खराब खाना बेचने के मामले सामने आए हैं, उसका ठेका भी आरके एसोसिएट के मालिक आरके अग्रवाल के पास है। देश की सबसे बड़ी रेस्त्रां की चेन कमशम भी इसी कम्पनी की है। किसी बड़े आदमी की शिकायत के बाद जब रेलवे कभी इनकी ट्रेनों में घटिया खाना बेचने का मामला पकड़ता भी है, तो एक लाख रुपये का जुर्माना लेकर मामला रफादफा कर दिया जाता है। सूत्रों की माने तो आरके एसोसिएट के खिलाफ पहले भी घटिया खाना बेचने के मामले सामने आ चुके हैं। यह सिंडिकेट रेलवे बोर्ड के कई बड़े अफसरों तक फैला हुआ है। इसके चलते घटिया या खराब खाना बेचने का मामला पकड़ने के बावजूद इस कम्पनी के खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं होती।
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यह है मुनाफे का गणित
सामान्य दिनों में लखनऊ-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस की चेयरकार की 11 बोगियों के 858 और एसी प्रथम बोगी की दो बोगियों के 112 यात्री सफर करते हैं। मतलब 75 रुपये प्रति यात्री के हिसाब से 970 यात्रियों से प्रति फेरे रेलवे 72750 रुपये खानपान के लिए ले लेता है। भीड़ बढ़ने पर दो से तीन अतिरिक्त बोगियां जुड़ने से लगभग 200 यात्री बढ़ जाते हैं। देश भर में राजधानी एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस में एक समय की थाली की कीमत 75 रुपये वसूली जाती है। जबकि नाश्ते के लिए 44 रुपये अलग से लिये जाते हैं। खाने की थाली में से कम्पनी को 14 प्रतिशत वैट और 4.46 प्रतिशत सर्विस टैक्स देना होता है। इसके बाद बचे हुए 61 रुपये में 11 रुपये की रेल नीर यात्रियों को दी जाती है। इन रुपयो में कम्पनी को अपने ठेके की राशि, ट्रेनों में काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन, खानपान सामग्री की लागत निकालकर मुनाफा कमाना होता है। इस मुनाफे का एक हिस्सा संरक्षण देने वाले रेलवे अधिकारियों तक भी पहुंचता है। शेष बचे हुए 50 रुपये के हिसाब से खाने का मैन्यू तैयार होता है।

ट्रेन में खाने का मैन्यू
-टमाटर का सूप
-सूप स्टिक
-बटर चिकलेट
-दो पराठे
-दाल
-पनीर की सब्जी या चिकन
-पुलाव
-सलाद व अचार
-दही
-एक पीस मिठाई या आइसक्रीम
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1999 से नहीं बढ़े दाम
मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों में तो रेलवे ने पिछले दिनों खानपान की दर महंगी कर दी, लेकिन राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों में 1999 के बाद से कोई वृद्घि ही नहीं की गई है। पिछले 14 साल में महंगाई कई फीसद बढ़ चुकी है। ऐसे में मुनाफा कमाने के लिए खानपान का ठेका लेने वाली कम्पनियां गुणवत्ता के साथ समझौता कर रही हैं।

बढ़ेंगे दाम
राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस के मैन्यू के अनुसार यात्रियों को खाना मुहैया कराने के लिए इसकी दर 75 रुपये से बढ़ाकर 120 रुपये करने की तैयारी की जा रही थी। यह प्रस्ताव पूर्व रेलमंत्री पवन बंसल के सामने आया था। इससे पहले की नई दर लागू होती, पवन बंसल को रेलवे बोर्ड में सदस्य विद्युत की तैनाती के लिए एक रेलवे अफसर के साथ हुए घूसकांड के आरोप में हटना पड़ा।

छह माह में 450 शिकायत
देश भर में हर माह खाने की घटिया गुणवत्ता की 60 से अधिक शिकायतें रेलवे बोर्ड को मिल रही हैं। जनवरी 2013 से 15 जुलाई तक घटिया खाने के 450 मामले सामने आ चुके हैं।

यहां करें शिकायत
रेलवे कार्रवाई भले न करे लेकिन घटिया खाने की शिकायत दर्ज कराने के लिए उसने जीएम स्तर पर एक एसएमएस हेल्पलाइन जरूर चला रखी है। यात्री उत्तर रेलवे मुख्यालय की हेल्पलाइन 09717630982 पर घटिया खाने की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

इस साल के अन्य मामले
-27 अप्रैल : भोपाल-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस में खराब खाने की आपूर्ति। यात्रियों की तबियत बीच रास्ते बिगड़ी
-22 अप्रैल : न्यू जलपाईगुड़ी-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के 32 यात्रियों ने खराब खाना खाने के बाद तबियत बिगड़ने की शिकायत की थी।
-11 मई : रांची राजधानी एक्सप्रेस की बोगी ए-1, ए-2 और एचए-1 के 30 यात्रियों ने फूड प्वाइजनिंग के कारण स्वास्थ्य खराब हो जाने की शिकायत दर्ज की थी।

कार्रवाई से बच रहा रेलवे
रविवार को शताब्दी एक्सप्रेस में खराब खाने का मामला सामने आने पर भी रेलवे के आला अफसर कोई भी कार्रवाई से बचते रहे। इस बारे में उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नीरज शर्मा का कहना है कि पुलाव में बड़ी इलायची थी जिसे यात्री काकरोच समझ बैठे थे। इस ट्रेन में उत्तर रेलवे के मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (कैटरिंग) एमएस चालिया भी यात्रा कर रहे थे।
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