लखनऊ। अक्सर गंदगी की शिकायत झेलने वाले ट्रेनों के बिस्तर अब यात्रियों की जान बचाने में भी मददगार साबित होंगे। ट्रेनों की एसी बोगियों में लगने वाली आग के आगे अब फायरप्रूफ बेडरोल सुरक्षा कवच बनेंगे। यह फायर प्रूफ बिस्तर आग को बढ़ने से रोकेंगे और उसके असर को कम कर यात्रियों की जान बचाने में मददगार होंगे। रेलवे बोर्ड ने फायर प्रूफ बिस्तरों की आपूर्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। लखनऊ में गोमती एक्सप्रेस की एसी द्वितीय बोगी में अगले माह पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर फायर प्रूफ बिस्तरों की आपूर्ति करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गोमती एक्सप्रेस में इन बिस्तरों की आपूर्ति के बाद इसकी गुणवत्ता की जांच की जाएगी।
अभी कई निजी कंपनियों के पास सौ फीसदी पॉलिस्टर की चादर पर फायर प्रूफ कोटिंग वाले बिस्तर उपलब्ध हैं। आग लगने के समय इन बिस्तरों की फायर प्रूफ कोटिंग उसके असर को बहुत कम कर देती है। इससे जानमाल की हानि की सुरक्षा भी हो जाती है। ट्रेनों में शॉर्ट सर्किट या अन्य कारणों से आए दिन होने वाली बड़ी दुर्घटनाओं में एसी बोगियों के बिस्तरों से सबसे अधिक आग फैलती है। आग में सूती चादरें और तकिया पल भर में आग पकड़ लेती हैं। आग के कारण होने वाली जानमाल की हानि को कम करने के लिए रेलवे ने भी इसी फार्मूले के आधार पर अपनी ट्रेनों में फायर प्रूफ कोटिंग वाले बिस्तरों की आपूर्ति की योजना तैयार की है। फायर प्रूफ कोटिंग के बिस्तर की लागत तीन गुना अधिक होगी। इसे उपलब्ध कराने का प्रस्ताव उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने रेलवे बोर्ड को भेजा था। जिस पर रेलवे बोर्ड ने टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। लखनऊ मंडल के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक फायर प्रूफ कोटिंग के बिस्तर बनाने वाली कई कंपनियों के साथ रेलवे बोर्ड के अधिकारियों की बैठकें मई में हुई थीं। उनसे बातचीत के बाद करीब 500 बिस्तरों की आपूर्ति करने का टेंडर फिलहाल जारी किया जा रहा है। अगले माह के अंत तक इनकी आपूर्ति हो सकेगी। इन 500 बिस्तरों में से रेलवे बोर्ड लखनऊ मंडल को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर परीक्षण के लिए 60 बेडरोल मुहैया कराएगा। इसकी गुणवत्ता यदि मानकों पर खरी उतरी तो आगे लखनऊ मेल सहित कई मुख्य ट्रेनों में फायर प्रूफ बिस्तर उपलब्ध होंगे।