किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए अभ्यर्थियों की पहली पसंद बनी है। यही वजह रही कि पहले ही दिन केजीएमयू में सामान्य कोटे की सीटें फुल हो गईं।
ऐसे में अब दूसरे दिन की काउंसलिंग में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के पास केजीएमयू चुनने का विकल्प ही नहीं रहेगा।
लगवाए गए मॉनीटर
पहले दिन काउंसलिंग के लिए 500 रैंक तक के अभ्यर्थियों को विकल्प चुनने के लिए बुलाया गया था। सुबह से ही लखनऊ में बनाए गए संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एसजीपीजीआईएमएस) में अभ्यर्थी और उनके परिजन की भीड़ रही।
अव्यवस्था से बचने के लिए बाहर हॉल में बची हुई सीटों वाले कॉलेज की सूची को डिस्प्ले करने के लिए मॉनीटर लगवा दिए गए। गुरुवार को रजिस्ट्रेशन और सत्यापन के लिए 901-2000 रैंक तक के अभ्यर्थी भी पहुंचे थे।
इसकी वजह से भी भीड़ संभालने में प्रबंधन का काफी मुश्किलें हुईं। पहले दिन सभी चार केंद्रों पर सामान्य वर्ग की 312 और ओबीसी वर्ग की 118 सीटें भरी गईं।
मेडिकल यूनिवर्सिटी रही पहली पसंद
इनमें से लखनऊ में 163 छात्रों ने काउंसलिंग में हिस्सा लिया। काउंसलिंग की शुरुआत के साथ ही अभ्यर्थियों ने विकल्प के तौर पर केजीएमयू को चुना। दूसरी प्राथमिकता में विकल्प जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर, एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ और एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा रहे।
उधर, ऊंची रैंक वाले अभ्यर्थी सीपीएमटी से दूरी ही बना रहे हैं। लखनऊ केंद्र पर केवल सातवीं रैंक के अभ्यर्थी ने ही काउंसलिंग में हिस्सा लिया। 500 की रैंक तक के 70 अभ्यर्थी पहले दिन की काउंसलिंग में शामिल नहीं हुए।
को-ऑर्डिनेटर डॉ. जीसी पुरोहित ने बताया कि केजीएमयू में सामान्य वर्ग की 105 सीटों में से केवल चार सीटें बची हैं। यह सीट शारीरिक अक्षम और स्वतंत्रता सेनानी कोटा के लिए सुरक्षित हैं। बाकी सभी सीटों पर ऊंची रैंक वालों ने कब्जा कर लिया है।
कहां कितने अभ्यर्थियों ने चुने मेडिकल कॉलेज
केंद्र संख्या
लखनऊ 163
इलाहाबाद 75
मेरठ 71
कानपुर 121
कहां कितनों ने कराया रजिस्ट्रेशन
केंद्र संख्या
लखनऊ 174
इलाहाबाद 113
मेरठ 82
कानपुर 120
(नोट : इसमें दूसरे दिन के छूटे अभ्यर्थी भी शामिल हैं।)
आज भी होगा सत्यापन
शुक्रवार को 501-900 रैंक तक के अभ्यर्थियों को कॉलेज का विकल्प चुनने के लिए बुलाया गया है। वहीं 2001-3500 की रैंक तक के अभ्यर्थी रजिस्ट्रेशन और सत्यापन कराएंगे।
सत्यापन की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए अंतिम रैंक को 1700 से बढ़ाकर 2000 कर दिया गया था। विकल्प चुनने के लिए एमबीबीएस और बीडीएस के साथ बीएएमएस व बीएचएमएस कोर्स के लिए सरकारी कॉलेज में सीटें लॉक की जा सकती हैं।
बीएएमएस और बीएचएमएस कोर्स में मान्यता के बाद ही सीट लॉकिंग शुरू होगी।