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रमजान में हर नेक अमल को है इबादत का दर्जा

Thu, 18 Jul 2013 05:32 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। रमजानुल मुबारक अल्लाह के पाक महीने में हर नेक अमल को इबादत का दर्जा है। अगर इंसान आंखें बंद कर आराम करे या सो जाए तो वे पल भी अल्लाह इबादत में शुमार कर लेता है। यह सिर्फ किसी एक जाति धर्म के लिए नहीं बल्कि आलम-ए-इंसानियत के लिए पैगाम-ए-इलाही है। बुधवार को यही संदेश देते हुए उलमा ने दरगाहों व मस्जिदों में दर्स-ए-कुरान व तरावीह में लोगों को नेक अमल करने के लिए प्रेरित किया।
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बुधवार को दरगाह शाहमीना शाह स्थित जामा मस्जिद में नमाज व तिलावत के दौर के बीच मौलाना कारी मोहम्मद हन्नान बोकारवी ने कहा कि अल्लाह के पाक महीने में सोना भी इबादत है और नेकी करने का बहुत सबाब है। उन्होेंने कहा कि अल्लाह कुरान के माध्यम से आलम-ए-इंसानियत को रोशनी देता है, यहां कोई बंधन नहीं है। ईदगाह इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने दारुल उलूम फिरंगी महल में कहा कि रमजान में अल्लाह अपने बंदों के हर नेक अमल को नेकी में तब्दील कर देता है। किसी को सहारा दिया वह नेकी है किसी को पानी पिलाया यह भी नेकी है यहां तक कि अगर आप ने किसी से प्यार से बोल दिया यह भी नेकी में शुमार कर ली जाएगी। सुन्नी बोर्ड आफ इंडिया के अध्यक्ष शहाबुद्दीन खान ने इस्लाम में रोजा, नमाज, और हज व जकात के महत्व पर प्रकाश करते हुए कहा कि रोजा इस्लाम में सिर है और नमाज आंखों की ठंडक करार दी गई है। उन्होंने कहा कि रमजान में अच्छा व्यवहार भी इबादत का दर्जा हासिल है।
तहसीन की मस्जिद में दर्स ए कुरान के मौके पर मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि रमजान बरकत व इबादत का खास महीना है। इस महीने में रोजेदार अगर रोजा रख कर सो जाए तो उसके सो जाने को भी अल्लाह इबादत करार देता है। इसी क्रम में दर्स देेते हुए मौलाना मिर्जा नुसरत अली ने कहा कि रमजान में नेकी करने वाला हर इंसान अल्लाह की रहमत का हकदार होता है।
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