लखनऊ। पति-पत्नी के बीच विवाद के चलते जिस मासूम को तलाशने के लिए कोर्ट-कचहरी हुई, कब्र तक खोदी गई वह ढाई साल बाद मिल गया। जिस मां ने बच्चे के जीवित न होने की कसम खाई थी, वही बृहस्पतिवार को उसे आंचल में छिपाकर थाने पहुंची। पुलिस ने कानूनी दांवपेंच के चलते मासूम को पिता के हवाले कर दिया। इसके साथ ही एक मां से उसका बच्चा दूर हो गया।
मासूम को पाने की यह लड़ाई संतोष यादव और सुषमा के बीच वर्ष 2011 से चल रही थी। मडियांव के समाधानपुरवा निवासी संतोष की शादी वर्ष 2010 में बीकेटी के कोटवा गांव की सुषमा से हुई। पीएसी में नौकरी कर रहे संतोष का पत्नी से शादी के बाद विवाद शुरू हो गया। इस पर सुषमा मायके चली आई। 14 जनवरी 2011 को उसने लोहिया अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया। बेटे के जन्म की जानकारी मिलने पर संतोष ससुराल पहुंचा। ससुराल में उसे बच्चे की मौत हो जाने की खबर दी गई। भरोसा न होने पर उसने ससुराल वालों पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए बच्चे को पाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर सुषमा और उसके परिजनों के खिलाफ पांच नवंबर 2012 को बीकेटी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ।
विवेचना के दौरान पुलिस ने भी सुषमा के बयान के आधार पर कोर्ट में बच्चे की मौत की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट दाखिल की। पुलिस का कहना था कि मां खुद अपने बच्चे की मौत की बात कर रही है। हालांकि संतोष इससे सहमत नहीं था। संतोष ने अपने बच्चे के कथित शव का डीएनए टेस्ट कराने की मांग उठाई। कोर्ट के आदेश पर पांच जून 2013 को कथित कब्र की खुदाई में पुलिस को शव नहीं मिला। इस पर आठ जुलाई को पुलिस ने एक नोटिस बच्चे की मां सुषमा, नाना भोला यादव, मामा अखिलेश और विमलेश को भेजा। खुद को फंसता देख मायके वाले सुषमा के साथ बच्चे को लेकर थाने पहुंच गए। बच्चे का नाम शुभम उर्फ वंश है। अगली कार्यवाही तक के लिए बच्चे को पुलिस ने पिता के सुपुर्द कर दिया है।
बेटे के लिए बोला झूठ
बेटे के छिनने के डर से सुषमा का थाने में रो-रोकर बुरा हाल था। वह बेटे को खुद से अलग न करने की रट लगाए थी। उसका कहना था कि पूरा झूठ केवल अपने बच्चे की सलामती के लिए बोला। पति जब मुझे ही ठीक से नहीं रख सका तो मेरे बच्चे को कैसे रखेगा। हमारे आपसी विवाद पर एक नवंबर 2011 को समझौता हो गया था। इसमें उसने खुद बच्चे पर दावा नहीं करने की बात कही थी। मुझे डर है कि पति बच्चे का मार देगा।