लखनऊ। उत्तराखंड में लगातार बारिश के बाद आया सैलाब तो गुजर गया, लेकिन बर्बादी और अपनों के खोने का दर्द हमेशा के लिए दे गया। किसी ने अपना पूरा परिवार खोया है, तो किसी ने रिश्तेदार। 10 दिन गुजरने के बाद भी अभी पहाड़ों में फंसे लोगों की जानकारी अपनों तक नहीं पहुंच सकी है। कोई हरिद्वार में पहुंचकर परिवार के सदस्यों की जानकारी ले रहा है, तो कोई राहत शिविरों की खाक छान रहा है। परिजनों की फोटो हाथ में लिए लोग राहत शिविरों के बाहर जानकारी जुटा रहे हैं। ऐसे में उत्तराखंड में वीभत्स हो रहे हालातों के बीच जिंदगी बचाकर घर लौट रहे लोग दूसरे परिवारों के दिल में भी रोशनी की किरण पैदा कर रहे हैं।
भांजी की तलाश में गुजरे सात दिन, तलाश जारी
इंद्रानगर निवासी धनंजय श्रीवास्तव का परिवार उन बदनसीब में से एक है, जिन्होंने आपदा में सब कुछ खो दिया। धनंजय की 16 साल की बेटी धैर्या को बचाए जाने की सूचना उत्तराखंड सरकार की सूची से तो मिली, लेकिन परिवार के बाकी सदस्यों का कोई पता नहीं चला। कृति पब्लिकेशन के मालिक धनंजय के साथ उनकी पत्नी सुनीता, बेटा आदित्य, बेटी धैर्या थे। भांजी को लेने के लिए उसके मामा बृजेश श्रीवास्तव हरिद्वार रवाना हो गए। बृजेश ने बताया कि 18 जून से वह धैर्या की तलाश हर राहत शिविर में कर चुके हैं, लेकिन अभी तक उसका भी कोई पता नहीं चला है। मंगलवार को वह गोचर स्थित हवाई अड्डे पर पहुंचे। सात दिन से चल रही उनकी तलाश जारी है। फोन पर बृजेश ने बताया कि वे हर जगह धैर्या की तलाश कर चुके हैं। परिवार के बाकी सदस्यों की कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। ऐसे में अब बाकी सदस्यों के बचने की आशा ही खत्म हो रही है।
पूरी बस में बचे सिर्र्फ चार लोग
माल इलाके से बस से उत्तराखंड गए 60 यात्रियों में से अब तक सिर्फ चार लोग ही लौटे हैं। बाकी लोगों को कोई पता नहीं चला है। वापस लौटे काकराबाद गांव निवासी भैयालाल, रामकुमार, छिन्नीलाल, बाबा छोटादास भी अपनों को खो चुके हैं। रामकुमार की पत्नी रामकुमारी भी बस में केदारनाथ दर्शन के लिए साथ गई थीं। इसके अलावा बजलू शाह, बाजार गांव निवासी नागेश्वर, बनइयां गांव निवासी रामस्वरूप, शिताला देवी, मुन्नी सिंह, जलथंभा गांव निवासी अमर सिंह, राजरानी व उनकी बेटी रामदेवी भी लापता हैं। नागेश्वर के बेटे श्यामू ने बताया कि पूरा परिवार उनके खेने की आशंका में बेहाल है। समझ में नहीं आ रहा कि कैसे उनकी तलाश करें। समय गुजरने के साथ जिस तरह वहां हालात बिगड़ने की जानकारी सामने आ रही है। उससे तो दिल में एक डर पैदा हो रहा है कि अब शायद ही कभी हम अपने पिता को देख पाएं।
पापा से गौरीकुंड में आखिरी बात हुई
बिहारीपुर, सआदतगंज निवासी अयोध्या प्रसाद रस्तोगी केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकले थे। बेटे संतोष रस्तोगी ने बताया कि पापा से 15 जून को बात हुई थी। पापा कह रहे थे कि मां हंस मुखी देवी के साथ वह गौरीकुंड पर हैं। उनका 16 जून के बाद लखनऊ वापस आने का कार्यक्रम था। 16 जून को पहाड़ों पर आए जलजले के बाद सब कुछ तहस-नहस हो गया। इसमें संतोष ने अपने माता-पिता को भी खो दिया। संतोष का कहना है कि हमारी तमाम कोशिश के बाद भी अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। अब हमें बताया गया है कि देहरादून जाकर परिजनों की तलाश करने से शायद कोई मदद मिल सके। संतोष अब खुद अपने रिश्तेदारों के साथ माता-पिता की तलाश में निकल गए हैं। अपनों के खोने के डर के चलते उनकी भूख-प्यास पहले ही खत्म हो चुकी है। आंखों में आंसू लिए संतोष का कहना है कि कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन यह भी देखना पड़ेगा। अब तो बस एक ही आस है कि शायद देहरादून जाकर ही कुछ पता चल सके।
.. तो कैसे लौट कर आएगा मेरा परिवार
मैं कैसे कहूं कि परिवार जिंदा हो सकता है। मैंने अपनी आंखों के सामने पूरे परिवार को बहते देखा है। केदारनाथ त्रासदी में अपने परिवार को खो चुके आशीष शर्मा पूरी तरह से टूट चुके हैं। आशीष ने बताया कि यात्रा पर उसके साथ पिता नवल किशोर, मां मालती और बहने रोमा व दीक्षा भी गई हुई थीं। 16 जून को हुए हादसे में किसी तरह वह बच गया। बचने के बाद तीन दिन तक पहाड़ों में अपने परिवार की तलाश करने के बाद उसे परिजन वापस लखनऊ लेकर आए। अब आशीष परिवार के वापस लौटने की आस छोड़ चुका है। इसके बाद भी परिवार के दूसरे सदस्य हर आने वाली जानकारी पर निगाह बनाए हुए हैं। उनका मानना है कि शायद कोई दैवीय चमत्कार हो जाए और उनके परिवार के सदस्य वापस लौट आएं।
तलाश के बाद खुद वापस लौटे, परिवार नहीं
हाईकोर्ट बेंच में वकील अनुराग श्रीवास्तव का पूरा परिवार भी त्रासदी का शिकार हो गया। केदारनाथ की यात्रा पर 18 लोगों के दल में वह परिवार सहित गए थे। दल में अभी तक सिर्फ एक सदस्य को बचाया जा सका है। राजाजीपुरम् निवासी अनुराग श्रीवास्तव के भाई अंशुमान श्रीवास्तव खुद उत्तराखंड पहुंचे। वहां काफी तलाश करने के बाद भी अनुराग श्रीवास्तव, उनकी पत्नी गीता, बेटी अर्पिता व मितुषी का कोई पता नहीं चला। हार-थकर अंशुमान वापस लौट आए। पूरा परिवार उनकी वापसी के लिए प्रार्थना कर रहा है। गायब होने वाले दल में अनुराग के रिश्तेदार और दोस्त राजे कुमार के परिजन शामिल थे। गायब होने वालों में सरोज लालोरिया, रीता सक्सेना, हेमंत सिन्हा, अक्षित सक्सेना, अनुराग श्रीवास्तव, गीता श्रीवास्तव, विदुशी, अर्पिता, अमृश, रश्मि, नमिता, निधि, अमन, सूर्यांश, आदित्य, श्रीपत हैं। दल में ज्यादातर बच्चे ही थे। राजे कुमार की हालत गंभीर है, उनका इलाज देहरादून में चल रहा है।
भैया-भाभी की नहीं मिली जानकारी
राजाजीपुरम् निवासी गुड्डा शर्मा के भाई रामनरायन शर्मा के परिवार का भी अभी तक पता नहीं चला है। ये आठ जून को केदारनाथ धाम की यात्रा पर गए थे। 16 जून के हादसे के बाद भतीजे संजय शर्मा ने उन्हें फोन किया। केवल हैलो की आवाज के बाद सन्नाटा छा गया। अब वहां क्या हुआ? इसकी जानकारी के लिए मोबाइल पर कोई संपर्क नहीं हो सका। यात्रा पर रामनरायन शर्मा के अलावा उनकी पत्नी आशा शर्मा, बेटी अंजू शर्मा, बेटा संजय साथ थे। इस पूरे परिवार की कोई जानकारी परिजनों तक नहीं पहुंच सकी है। पूरा परिवार इस समय परेशान हाल उनकी वापसी की प्रार्थना कर रहा है।
सास को खो दिया, अब वापसी को प्रार्थना
जनता नगरी निकट शिक्षा भवन निवासी माया मिश्रा केदारनाथ हादसे के बाद से फंस गई। उनकी बेटी और दामाद उनके वापस नहीं आने पर परेशान हैं। दामाद संतोष शुक्ला ने बताया कि हम सभी का रो-रोकर बुरा हाल है। माया मिश्रा के अलावा तीन अन्य लोग उनके साथ गए थे। इनमें से केवल उनकी बहन शालिनी त्रिवेदी ही वापस लौट सकी हैं। माया मिश्रा के अलावा उनके सास-ससुर भी इस सैलाब में बह गए। संतोष शुक्ला ने तलाश के लिए अब खुद उत्तराखंड जाने की बात कही है। उनका कहना है कि शायद वहीं से कोई जानकारी मिल सके।
भाई के वापस लौटने की आखिरी आस बाकी
लखनऊ के उमाकांत तिवारी ने बताया कि बाराबंकी से 34 लोगों का दल बस से केदारनाथ गया था। इस बस में उनके चचेरे भाई रमाकांत तिवारी व पत्नी मालती देवी निवासी रायबरेली भी सवार थे। हादसे के समय से ठीक पहले गौरीकुंड पर 11 लोग बस से उतर गए थे। इन लोगों के बचने की जानकारी है। 23 लोग जो बस में सवार थे, उनका कोई पता नहीं चल सका है। लापता लोगों में रमाकांत का परिवार भी शामिल है। अब उनके छोटे भाई श्यामू तिवारी उनकी तलाश में जुटे हुए हैं।