लखनऊ। फर्जी पासपोर्ट के साथ अमौसी एयरपोर्ट पर धरे गए दो संदिग्ध बांग्लादेशियों ने खुलासा किया है कि एजेंटों ने उन्हें दुबई में नौकरी और फर्जी पासपोर्ट दिलाने के लिए पांच-पांच लाख रुपये लिए थे। बताया जा रहा है कि एजेंटों की एयरलाइंस के कर्मचारियों से भी साठगांठ है। उनके जरिए ही वे कबूतरबाजी को अंजाम देते हैं। एयरपोर्ट में तैनात इमिग्रेशन विभाग के अधिकारियों ने इस मामले में सरोजनीनगर थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
असिस्टेंट इमिग्रेशन ऑफीसर दीपक धानिया ने बाबूचंद्र शील के नाम रिपोर्ट दर्ज कराई है। बाबूचंद्र बांग्लादेश के फुलना जिले के दौलतपुर के तालापार स्थित रैलीगेट का रहने वाला है। उसने पूछताछ में कबूला कि पश्चिम बंगाल में अमीर नाम के एजेंट ने उससे दुबई भिजवाने और फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने के लिए पांच लाख रुपये लिए थे। कोलकाता आने के बाद एजेंट ने उसे केरल भी भेजा था। बाबू के पास से जो पासपोर्ट बरामद हुआ है वह बांग्लादेश के मेदिनीपुर के महिषादलपुरवा स्थित गोपालपुर निवासी निताई वाग के नाम पर है। एजेंट ने निताई की जगह बाबू का फोटो लगा दिया था। इसी तरह दूसरे बांग्लादेशी हसन मोहम्मद पुत्र अब्दुल सैफ के खिलाफ एफआरआरओ विभाग के अधिकारी संदीप करकटा ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। हसन बांग्लादेश के जैसोर स्थित न्यू मार्केट ब्लॉक का रहने वाला है। उसने बताया कि शरीफुल नामक एजेंट ने पांच लाख रुपये लिए थे पासपोर्ट और दुबई भेजने के लिए। हसन के पास से बरामद पासपोर्ट वर्ष 2007 का बना हुआ है। वह जी सेन गुप्त रोड स्थित अनामिका अपार्टमेंट निवासी रमेश कुमार पांडेय के नाम पर है। एजेंट रमेश की फोटो के ऊपर हसन का फोटो लगा दिया था। हसन रमेश बनकर जा रहा था। रमेश का पासपोर्ट कुछ माह पहले चोरी हो गया था। उसकी रिपोर्ट भी दर्ज है। बताते चलें कि बुधवार को ब्यूरो आफ इमिग्रेशन के अधिकारियों ने दो संदिग्धों को चेकिंग के दौरान एयरपोर्ट पर धर लिया था। दोनों फर्जी पासपोर्ट के जरिए सऊदी अरब जा रहे थे।