लखनऊ। परिषदीय स्कूलों में नए शिक्षा सत्र से छात्रवृत्ति पाने में कई मुश्किलें हैं। दरअसल, सभी छात्रों को बैंक खातों के माध्यम से छात्रवृत्ति देने के निर्देश हैं लेकिन इस व्यवस्था के नतीजे पहले अच्छे नहीं रहे हैं। हालांकि, जिला प्रशासन के स्तर पर कोशिशें शुरू कर दी गई हैं लेकिन पहले भी राजधानी में खाते न खुल पाने से कई अल्पसंख्यक छात्रों के लिए छात्रवृत्ति पाना मुश्किल रहा है। शैक्षिक सत्र 2012-13 में परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक छात्रों को पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना का लाभ बैंक खातों के जरिए देने की व्यवस्था की गई थी। इस संबंध में शासनादेश तक जारी किए गए। इसके मुताबिक इन सभी छात्रों के खाते सार्वजनिक बैंक में खोले जाने थे। जिलाधिकारी की ओर से बैंकों को स्कूल द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचनाओं और पते को आधार मानकर खाते खोलने के लिए भी कहा गया लेकिन बैंकों ने इससे हाथ खींच लिए। स्थिति यह रही कि दो महीनों की लंबी मशक्कत के बाद भी राजधानी के परिषदीय स्कूलों से एक हजार से ज्यादा छात्रों के खातों की सूचना ही नहीं पहुंच पाई।
यहां हैं पेंच ः परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के बैंक खाते खोलने में सबसे बड़ी परेशानी निवास प्रमाण-पत्र को लेकर है। एक बैंक अधिकारी की मानें तो परिषदीय स्कूलों में आमतौर पर मलिन बस्ती और झुग्गी झोपड़ियों से बच्चे पढ़ने आते हैं। इनके अभिभावकों के पास कोई निवास प्रमाण-पत्र होना बहुत ही मुश्किल है जबकि कोई भी बैंक जरूरी प्रमाण-पत्रों के बिना खाता नहीं खोल सकता। दूसरी ओर इन खातों में सालभर में 300 से 500 रुपये का भुगतान होना है। एक बार पैसे निकलने के बाद कोई अन्य राशि आने की भी कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में बैंक अधिकारी इतनी बड़ी संख्या में खाते खोलने से बचते हैं।
ये हैं जिम्मेदारों के दावे ः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सर्वदानंद ने बताया कि पहले हुई दिक्कतों को दूर करने के लिए सभी स्तर पर व्यवस्था की जा रही है। जिला प्रशासन के स्तर पर आयोजित एक बैठक में सभी बैंक प्रतिनिधियों से उनकी परेशानियां जानी गई हैं जिसके अनुसार विभागीय स्तर पर व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। सभी बैंकों को दस साल से ज्यादा आयु के हर छात्र के अलग खाते खोलने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए स्कूल से उपलब्ध कराई जाने वाली सूचनाओं को ही आधार बनाया जाएगा। शिक्षक की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचनाओं को खंड शिक्षा अधिकारी प्रमाणित करेगा। यहां से जारी सूचनाओं को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के स्तर पर प्रमाणित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जल्द से जल्द सभी छात्रों के खाते खुलवा लिए जाएंगे।
31 मई तक होनी है यूनिफॉर्म देने की तैयारी ः परिषदीय स्कूलों में समय पर यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए 31 मई तक सभी छात्र-छात्राओं के माप लिए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि, जिलाधिकारी की ओर से स्कूलों में छुट्टी घोषित करने के बाद ये काम कैसे पूरा होगा, ये एक बड़ा सवाल है। इधर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सर्वदानंद की मानें तो परिषदीय स्कूों में पढ़ने वाले बच्चे आमतौर पर आसपास के इलाकों के ही होते हैं। स्कूलों में कार्यरत शिक्षामित्र घर-घर जाकर आसानी से इस काम को कर सकते हैं।